राजनीति

'एक देश-एक चुनाव' पर बीजेपी ने PM को सौंपी स्टडी रिपोर्ट, हो सकते हैं ये बदलाव

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 30 , 2018 , 13:32 IST

बीजेपी ने 'एक देश, एक चुनाव' के आइडिया पर अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दी है। रिपोर्ट में मध्यावधि और उपचुनाव की प्रक्रिया को खारिज करने को कहा गया है। बीजेपी की स्टडी में पाया गया है कि अगर देश में एक साथ चुनाव हुए तो अविश्वास प्रस्ताव और सदन भंग करने जैसे मामलों से बचा जा सकेगा।

बीजेपी उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि बीजेपी और सरकार का मानना है कि अगर सदन में विपक्षी पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव लाती है तो विपक्षी पार्टियों को अगली सरकार के समर्थन में विश्वास प्रस्ताव भी जरूर लाना चाहिए।

उन्होंने ये भी कहा कि अगर किसी कारणवश कोई सीट खाली होती है तो उपचुनाव न करवा कर दूसरे स्थान पर रहने वाले व्यक्ति को विजेता घोषित किया जा सकता है।

आपको बता दें कि पिछले साल नरेंद्र मोदी ने बीजेपी और अपने काडर से इस बात पर विमर्श खड़ा करने को कहा था कि देश में एक साथ चुनाव कराए जाने चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी समूह ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के साथ मिलकर एक सेमीनार का आयोजन किया, जिसमें 16 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के 29 अकादमी सदस्यों ने इस विषय पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए थे।

एक बीजेपी नेता ने कहा कि 26 राज्यों के 210 डेलीगेट्स ने इस सेमीनार में हिस्सा लिया। इसके साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, जेडीयू लीडर केसी त्यागी और बीजेडी के पूर्व नेता बैजयंत पांडा भी शामिल थे।

4,500 करोड़ तक पहुंचेगा चुनावी खर्च

रिपोर्ट में आम चुनाव में होने वाले खर्च का जिक्र करते हुए कहा गया है कि 2009 और 2014 में अनुमान के तौर पर 1,115 करोड़ और 3,875 करोड़ रुपये क्रमशः खर्च हुए। अगर 31 विधानसभाओं में चुनाव हो, तो ये आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है।

हालांकि पैनल का मानना था कि अगर एक साथ चुनाव कराएं तो ये चुनावी खर्च 4,500 करोड़ तक होगा।

नीति आयोग ने रखा विमर्श पत्र

नीति आयोग ने भी इस मसले पर अपना विमर्श पत्र रखा है रिपोर्ट में हर साल होने वाले चुनावों की वजह से पब्लिक लाइफ पर पड़ने वाले असर की कड़े शब्दों में आलोचना की गई है।

नीति आयोग ने दो चरणों में चुनाव कराए जाने की सिफारिश की है। पहला लोकसभा और कम से कम आधे राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ 2019 में कराए जाने का प्रस्ताव है, तो दूसरा 2021 में बाकी के राज्यों के विधानसभा चुनाव।

हालांकि बीजेपी को छोड़ अन्य राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी और सीपीआई ने एक साथ चुनाव कराए जाने पर आपत्ति जताई है।


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