नेशनल

रोहिंग्या के खिलाफ गोविंदाचार्य ने SC में दायर की याचिका, कहा- देश के लिए खतरा

icon सतीश कुमार वर्मा | 0
1428
| सितंबर 8 , 2017 , 18:23 IST

रोहिंग्या मामले पर बीजेपी के थिंक टैंक रहे गोविंदाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। गोविंदाचार्य ने कोर्ट से पहले से लंबित मामले में खुद को भी पक्ष बनाए जाने की मांग की। गोविंदाचार्य ने रोहिंग्या लोगों को भारत में रहने देने की मांग का विरोध किया है। गोंविदाचार्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि भारत में पहले ही आबादी बहुत ज्यादा है।

Govind 1

सरकार को अवैध तरीके से रह रहे विदोशियों को निकालने का अधिकार

याचिका में कहा गया है कि हाल ही में लोग कूड़े के ढेर में दब कर मर गए, और ज्यादा लोगों को यहां बसाना गलत होगा। इस तरह की इंटेलिजेंस रिपोर्ट है कि अल कायदा रोहिंग्या मुसलमानों का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री खुद म्यांमार गए। वहां रोहिंग्या लोगों पर भी बात की। मसला सरकार को देखने दिया जाए। कोर्ट का दखल गैरज़रूरी है। फॉरनर्स एक्ट 1946 के तहत भारत सरकार को अवैध तरीके से रह रहे विदेशियों को निकालने का अधिकार है। खुद सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे अहम करार दे चुका है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के सलाह से सरकार ने वापस भेजने का लिया फैसला

राष्ट्रीय सुरक्षा, सलाहकार, आईबी और अर्धसैनिक बलों से सलाह के बाद ही भारत सरकार ने रोहिंग्या लोगों को वापस भेजने का फैसला किया है। रोहिंग्या जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से लगती सीमा के पास बस गए हैं। ये बहुत खतरनाक है। एक तरफ तो अनुच्छेद 370 का हवाला देकर भारत के लोगों की जम्मू-कश्मीर में बसने नहीं दिया जा सकता। दूसरी तरफ संदिग्ध विदेशियों को वहां रहने दिया जा रहा है।

रोहिंग्या मुससमानों ने भी सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

बता दें कि रोहिंग्या मुसलमानों ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा है कि भारत से निकालने पर उनकी मृत्यु लगभग निश्चित है और सरकार का यह कदम भारतीय संविधान के तहत सभी को मिले जीवन के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन है। इससे सभी अंतरराष्ट्रीय संधियों का भी उल्लंघन होगा। उनकी दलील है कि संविधान नागरिकों के साथ ही सभी व्यक्तियों को जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।

40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत में

म्यांमार के लगभग 40,000 रोहिंग्या मुसलमान भारत में हैं। म्यांमार एक बौद्ध देश है और ऐसी रिपोर्ट है कि वहां की सरकार ने अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय पर काफी अत्याचार किए हैं। रोहिंग्या समुदाय के दो लोगों मोहम्मद सलीमुल्ला और मोहम्मद शाकिर ने याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है, 'रोहिंग्या समुदाय को उनके देश म्यांमार वापस भेजने का प्रस्ताव देकर यहां की सरकार उसके लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रही है।

म्यांमार में जीवन का खतरा होने से रोहिंग्या भाग कर आए हैं भारत

याचिका में बताया गया है कि जीवन को खतरा होने के कारण बहुत से रोहिंग्या मुसलमान अपने देश से भागकर भारत आए हैं। अगर उन्हें वापस भेजा जाता है तो इससे उन्हें गंभीर खतरा होगा। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि वे शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनएचसीआर के पास शरणार्थी के तौर पर 2016 में पंजीकृत हुए थे और उन्हें शरणार्थी पहचान पत्र भी दिया गया है।

 


author
सतीश कुमार वर्मा

लेखक न्यूज वर्ल्ड इंडिया में वेब जर्नलिस्ट हैं

कमेंट करें