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अयोध्या विवाद पर विनय कटियार का विवादित बयान-'भगवान राम चाहते हैं एक और बलिदान'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 18 , 2018 , 10:13 IST

बीजेपी के फायरब्रैंड नेता और राज्यसभा सांसद विनय कटियार ने शनिवार को अयोध्या में एक बड़ा बयान दिया। विनय कटियार ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया है कि राम जन्‍मभूमि को हिंदू समुदाय से एक और बलिदान की जरूरत है। कटियार ने यहां एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि राम जन्‍मभूमि एक और बलिदान की मांग कर रही है और हिंदू समुदाय को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।'

कटियार ने आगे कहा, 'जिस तरह से छह दिसंबर 1992 को मुलायम सिंह यादव ने गोलीबारी करवाई थी और कई लोगों की मौत हुई थी, उसी तरह एक और क्रांति की जरूरत है और हिंदू समुदाय को ब‍लिदान के लिए जरूर तैयार रहना चाहिए।'

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कटियार ने कहा कि अब तक करीब साढ़े तीन लाख लोगों ने राम जन्मभूमि के लिए अपना बलिदान दिया है और ऐसे ही एक और बलिदान के लिए हम सभी को तैयार होना होगा। उन्होंने कहा कि यह बलिदान कैसा होगा, अभी यह कहना कठिन है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का केस चल रहा है, इसका निर्णय क्या होगा यह तो नहीं पता लेकिन सवाल यह है कि जिन लोगों ने इस मुद्दे को लेकर अपना बलिदान दिया है उनका क्या होगा

भाषण के दौरान कटियार ने कहा कि हम सिर्फ मथुरा और काशी की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश में ऐसे कई देवस्थान हैं जिन्हें मुगल शासकों द्वारा तोड़ा गया है। कटियार ने आरोप लगाया कि कश्मीर में तमाम मंदिर तोड़े जा रहे हैं और देश में कई ऐसे स्थान हैं जहां मंदिरों को सुरक्षित रख पाना कठिन हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज यह जरूरत है कि जब तक अयोध्या में रामलला के मंदिर का निर्माण ना हो, हम सभी इसके लिए संकल्पित रूप से काम करते रहें। भाषण के दौरान श्री श्री रविशंकर की द्वारा की जा रही सुलह की कोशिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए कटियार ने कहा कि आज इस मामले में वह लोग वार्ता करने आ रहे हैं जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

इससे पहले 14 मार्च को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बाहरी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सिर्फ ऑरिजनल याचिकाओं को ही सुनने का आदेश दिया था और करीब 32 याचिकाओं को खारिज किया था। जिसमें बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी याचिका भी शामिल थी। इसके अलावा अपर्णा सेन, श्याम बेनेगल और तीस्ता सीतलवाड़ की याचिकाएं ने भी कोर्ट ने खारिज कर दी।

वहीं, दूसरी तरफ आर्ट ऑफ लिविंग समेत कई संगठन इस मसले को सुप्रीम कोर्ट के बाहर सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ऐसी कोई पहल कामयाब होती नहीं दिख रही है।

बता दें कि 6 दिसंबर, 1992 को हजारों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह ने कारसेवकों को रोकने के लिए गोलियां चलाने का आदेश दिया था, जिसमें कई कारसेवकों की मौत हो गई थी। बाबरी विध्वंस के बाद देशभर में दंगे भड़क गए थे, जिसमें करीब 2000 लोगों की जान चली गई थी। उल्लेखनीय है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद करीब एक सदी पुराना है, जो हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। फिलहाल इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, जिसकी सुनवाई 8 फरवरी से शुरु हुई है।


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