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लगता है जिंदगी आज कुछ ख़फा है, चलिए छोड़िए कौन सी पहली दफा है...

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 18 , 2018 , 09:45 IST

बॉलीवुड के बेहतरीन संगीतकार गुलजार का नाम आते ही उनके लिखे गीत, शायरी और गज़ल जुबां पर आ ही जाते हैं। फिल्म गुड्‌डी, इजाज़त, स्लमडॉग मिलियनर जैसी फिल्मों के लिए गीत लिखने वाले गुलजार का जन्म 18 अगस्त 1934 को झेलम (जो अब पाकिस्तान में है) के दीना नाम के छोटे से गांव में हुआ था। गुलजार का रियल नाम संपूर्ण सिंह कालरा है लेकिन शायद ही उनके इस असली नाम से कोई वाकिफ़ हो।

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बंटवारे के बाद वो परिवार के साथ पंजाब में आकर रहने लगे। गुलजार शुरुआत से एक लेखक बनना चाहते थे, लेकिन परिवार की मर्जी न होने पर वे उनके खिलाफ जाकर मुंबई पहुंचे और यहां एक गैराज में मैकेनिक के तौर पर काम करने लगे। साथ ही खाली समय में कविताएं लिखा करते थे।

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मुंबई पहुंचने के बाद गुलजार निर्देशक बिमल रॉय, ऋषिकेश मुखर्जी और संगीतकार हेमंत कुमार के साथ सहायक के तौर पर काम करने लगे। उन्होंने बिमल रॉय की फिल्म 'बंदिनी' में अपना पहला गाना 'मोरा गोरा अंग' लिखा। जबकि बतौर निर्देशक के तौर पर पहली फिल्म साल 1971 में 'मेरे अपने' बनाई। शुरुआती फिल्मों में उनकी पसंद संजीव कुमार रहे, जिनके साथ गुलजार ने कोशिश(1772), आंधी (1974), मौसम (1975), अंगूर(1981) और नमकीन (1982) जैसी फिल्में बनाई।

गुलजार, एक ऐसा नाम है जो हर दौर के युवाओं के पसंदीदा शायरों में सबसे ऊपर हैं। एक बेमिशाल शायर, लेखक, निर्देशक, निर्माता, गीतकार जैस कई पहचान उनके साथ जुड़े हुए हैं। बॉलीवुड की बात करें और गुलजार की बात ना हो तो कुछ अधूरा सा लगता है।

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गुलजार के लिखे गीतों में से एक गीत आज स्कूल की प्रेयर बन गई है। सन् 1971 में जय बच्चन की आई फिल्म गुड्डी में गाए गए गीत ‘हमको मन की शक्ति देना’ गुलजार ने ही लिखा था। जो आज देश के कई स्कूलों में मॉर्निंग प्रेयर बन गई है। फिल्म में भी यह स्कूल प्रेयर के तौर पर ही यूज किया गया था।

साल 1988 में आई फिल्म इजाज़त का ये गाना 'मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है' गुलज़ार के लिखे हुए गानों में सबसे ज्यादा पसंद किए गए गानों में से एक है। इस गाने को आशा भोंसले ने गया है। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और रेखा, मुख्य किरदार में नज़र आए थे।

गुलजार को स्लमडॉग मिलियनर के सॉन्ग जय हो के लिए 2009 में ऑस्कर भी मिल चुका है। वहीं 2010 में ग्रैमी अवार्ड से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

साल 2004 में गुलजार को भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया।

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सार्वजनिक जीवन में बेहद सफल रहे गुलजार की शादीशुदा जिंदगी उतनी बेहतर नहीं रही। उन्होंने एक्ट्रेस राखी से शादी की और दोनों की बेटी मेघना गुलजार हैं जो कि एक फिल्म डायरेक्टर हैं। बेटी के पैदा होने के एक साल बाद 1974 में दोनों अलग हो गए हालांकि गुलजार और राखी के बीच तलाक नहीं हुआ लेकिन दोनों लंबे समय से अलग रह रहे हैं।

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गुलज़ार साब अपनी नज़्मों में सीधे-सादे शब्दों से चौंका देेने वाली तस्वीरें गढ़ते हैं। कहीं तो पढ़ने वालों को अचानक काग़ज़ पर भारी-भरकम ख़याल दफनाये मिलते हैं और कहीं दिखाई देते हैं कर्ज़ की मिट्टी चबाते हुए किसान जो ख़ुदकुशी कर बैठते हैं।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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