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स्तनपान से ना सिर्फ बच्चे को बल्कि मां को भी है कई फायदे, जानिये

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 23 , 2018 , 18:41 IST

मां का दूध शिशु को पोषण देने के साथ उसे कई रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। इतना ही नहीं मां का दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होता है। शायद यही वजह है कि शिशु के लिए मां के दूध को अमृत कहा जाता है। खास बात यह है कि आसानी से पचने के साथ मां का दूध शिशु के पेट में हर तरह की गड़बड़ी की आशंका को भी कम कर देता है। साथ ही साथ जितना फायदा मां का दूध बच्चों के लिए होता है। उतना ही फायदा मां के लिए स्तनपान से भी है।

आइए जानते हैं कि शिशु और मां दोनो के लिए स्तनपान के फायदें:

मां के लिए स्तनपान के फायदें

1.कैलोरी घटाता है: (Calorie Incinerator)

माँ बच्चे को अपने दूध पिलाने से कई कैलोरी स्वचालित रूप से घटा सकती है | प्रति दिन 500 कैलोरी तक कम कर सकते हैं । इसका मतलब है कि आपको गर्भावस्था के वज़न कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा स्तनपान कराना चाहिए, जिससे आपका वज़न भी घटेगा और बच्चा भी सेहतमंद रहेगा |

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2.स्तन का दूध सर्वश्रेष्ठ दवा है: (Breastmilk is the Best Medicine)

स्तन का दूध न केवल पौष्टिक होता है बल्कि चमत्कारी औषधि के रूप में भी काम करता है | उदाहरण के लिए, आपके आँखों में कभी संक्रमण (infection) हो तो स्तनपान के लेपन करने की कोशिश करें तो कुछ मिनटों में सूजन कम हो जाता है । माँ का दूध शक्तिशाली है !!

3. कैंसर का खतरा कम करता है : (Reduced Risk of Cancer)

स्तनपान से लिम्फ नोड्स (lymph nodes) स्तन के अन्य घटकों के साथ सक्रिय हो जाते हैं। ये स्तन कैंसर का खतरा कम करते हैं | जो माँ अपने बच्चे को स्तनपान नहीं कराती है उन्हें स्तनपान करने वाली महिला की तुलना में स्तन कैंसर होने की अधिक संभावना होती है। पूर्व रजोनिवृत्ति ( pre menopausal) में गर्भाशय के कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है |

4. बेमिसाल ऊर्जा का लाभ मिलता है : (Gain of Unmatched Energy)

हर मां जब आप अपने बच्चे को स्तनपान कराती हैं ,उन्हें एक अद्वितीय शक्ति महसूस होती है। यह आपको सक्रिय रखता है और बच्चे के विकास के लिए भी ये बहुत महत्वपूर्ण है।

5. मासिक धर्म की छुट्टी: (Menstrual Vacation)

जब तक माँ अपने बच्चे को अच्छी तरह स्तनपान कराती है, तब तक आपकी मासिक स्त्रीबीजजनन(ovulation) की अवधि बढ़ती है | अर्थात प्रसव के बाद मासिक धर्म चक्र की शुरुआत देरी से होती है। जैसे-जैसे स्तनपान कम हो जाती है, वापस मासिक चक्र शुरू होता है स्तनपान कराने से ओवुलेशन में देरी होती है | ये प्रक्रिया या वक़्त हर माँ के लिए अलग भी हो सकता है |

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6.माँ और बच्चे के बीच अनोखा बंधन : (Bonding with the New Born)

स्तनपान कराने के दौरान माँ और बच्चे के बीच के संबंध में सुधार होता है | शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से माँ और बच्चे का रिश्ता और गहरा होता है।

7.शीघ्र घाव भरता है : (Improved Healing)

जन्म देने की प्रक्रिया के दौरान माँ के शरीर को बहुत अधिक घाव और पीड़ा से गुज़रना पड़ता है।स्तनपान की प्रक्रिया इन घावो को तेजी से भरती है और नई माँ को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में वापस लाने में मदद करता है।

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8.वजन कम होता है : (Less Weight Gain)

जैसा कि पहले कहा है, स्तनपान से कैलोरी घटती है | इसलिए वजन बढने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है | स्तनपान कराने से अतिरिक्त वज़न कम कर सकते है।

9.हार्मोन का संतुलन बनाए रखता है : (Hormonal Balance)

स्तनपान हार्मोन का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जब माँ बच्चे को दूध पिलाती है, तब तक आपको अपने चेहरे के मुहासे के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपके हार्मोन को ये बरकरार रखता हैं और इससे माँ अपने दैनिक कार्य को ख़ुशी और बिन बाधा कर सकते हैं |

10.प्राकृतिक गर्भनिरोधक है : (Natural Contraceptive)

स्तनपान अगले बच्चे के जन्म को नियंत्रित करने का एक स्वाभाविक तरीका है। यानी जब आप स्तनपान कर रहे हैं, तो गर्भवती होने की संभावना बहुत कम है। 98 – 99 प्रतिशत स्तनपान इसे नियंत्रण करता है । तो आप बिना कंडोम प्राकृतिक रूप से गर्भ निरोधक का काम करता है। ये प्रक्रिया या हर माँ के लिए अलग भी हो सकती है। 

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शिशु को फायदे

- मां का दूध बच्चे को रोगों से लड़ने में मदद करता है। मां के स्तन से पहली बार निकलने वाले दूध के साथ गाढ़ा पीले रंग का एक द्रव भी आता है, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं। इसे शिशु को जरूर पिलाना चाहिए । कहा जाता है कि शिशु को संक्रमण से बचने और उसकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में वह काफी मदद करता है।

-मां का दूध बच्चे के दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रखता है। इसे पिलाने से बच्चों की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ोतरी होती है।

-मां का दूध शिशु को उसी तापमान में मिलता है जितना तापमान खुद उसके शरीर का होता है। जिसकी वजह से शिशु को सर्दी लगने का खतरा कम रहता है।

- एक महिने से एक साल की उम्र में शिशु में SIDS (अचानक शिशु मृत्यु संलक्षण) का खतरा बना रहता है।जबकि मां का दूध शिशु को इस खतरे से बचाए रखता है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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