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पेश हुआ आर्थिक सर्वे, GDP 7.5% रहने की उम्मीद,महंगाई देगी झटका

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| जनवरी 29 , 2018 , 14:40 IST

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज लोकसभा में आर्थिक सर्वे 2017-18 पेश किया। इससे पहले बजट सत्र की शुरूआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से हुई। यह जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के बाद पहला आर्थिक सर्वे हैं।

हिंदी और अंग्रेजी में पेश किए गए इस सर्वे में भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है। हालांकि फाइनैंशल इयर 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7 से 7.5 पर्सेंट तक कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक सर्वे में कहा गया है कि मौजूदा फाइनैंशल इयर में जीडीपी की रफ्तार 6.5 पर्सेंट रह सकती है। सर्वे के मुताबिक आने वाले फाइनैंशल इयर में उपभोग आधारित ग्रोथ देखने को मिलेगी।

आपको बता दें कि मोदी सरकार का यह चौथा पूर्ण बजट है। जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला बजट है, वहीं 2019 लोकसभा चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट है। इस लिहाज से बजट काफी अहम बताया जा रहा है। बजट 1 फरवरी को पेश होगा।

सर्वे की अहम बातें...

- 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.5 पर्सेंट रहने का अनुमान।

- मौजूदा वित्त वर्ष में 6.75 पर्सेंट हो सकती है जीडीपी ग्रोथ।

- जीएसटी से इनडायरेक्ट टैक्स चुकाने वालों की संख्या में 50 पर्सेंट बढ़ोतरी।

- क्रूड ऑइल की कीमतों में इजाफे को लेकर जताई गई चिंता।

- 12 पर्सेंट तक बढ़ सकती हैं क्रूड की कीमतें, महंगाई में हो सकता है इजाफा।

- निजी निवेश में सुधार के संकेत।

- एक्सपोर्ट में सुधार की स्थिति देखने को मिलेगी।

- सरकार ने माना कि फाइनैंशल इयर 2019 में आर्थिक प्रबंधन में थोड़ी मुश्किल होगी।

- इस साल चालू खाता घाटा 1.5 से लेकर 2 पर्सेंट तक रह सकता है।

- मौजूदा वित्त वर्ष में कृषि ग्रोथ 2.1 पर्सेंट रहने का अनुमान।

- फाइनैंशल इयर 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा 3.2 पर्सेंट रहने का अनुमान।

जानें, क्या होता है इकॉनमिक सर्वे -

यह अर्थव्यवस्था पर सालाना रिपोर्ट कार्ड है, जिसे चीफ इकनॉमिक अडवाइजर पेश करते हैं। इस भारी-भरकम दस्तावेज में साल भर की अहम इकनॉमिक, फाइनैंशल और सोशल स्कीम्स का ऐनालिसिस होता है। धीरे-धीरे इसमें कई और सेक्टरों को जोड़ा गया और यह ज्यादा से ज्यादा ऐनालिटिकल होता चला गया। साल 2004-05 में यह सर्वे 362 पेज का था। 2010-11 में यह बढ़कर 459 पेज का दस्तावेज बन गया। पिछले साल इसमें महंगाई, फाइनैंशल सर्विसस पर अलग से चैप्टर दिया गया था, जिससे आर्थिक बहस में इन विषयों की अहमियत पता चलती है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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