राजनीति

कैराना समेत 4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर वोटिंग खत्म, 31 को आएंगे नतीजे

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1064
| मई 28 , 2018 , 17:14 IST

चार लोकसभा और नौ राज्यों में 10 विधानसभा की सीटों पर उपचुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो गई है। इन चुनावों में सबसे चर्चा का विषय उत्तर प्रदेश का कैराना का चुनाव रहा। जिसके बाद महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया और पालघर संसदीय सीटों के अलावा नगालैंड की एक लोकसभा सीट पर वोट डाले जा रहे हैं।

निष्पक्ष मतदान के लिए चुनाव आयोग और प्रशासन की पहल का असर मतदान केंद्रों के बाहर देखने को मिला है, जहां धीरे-धीरे वोटरों की तादाद बढ़ रही है। इन सभी सीटों के नतीजे 31 मई को घोषित किए जाएंगे।

2014 में नगालैंड को छोड़कर बाकी तीन सीटें भाजपा ने बड़े अंतर से जीती थीं। लेकिन इस बार इन तीनों पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

संयुक्त गठबंधन का ट्रायल है कैराना-:

कैराना लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी का मुकाबला संयुक्त विपक्ष से है। बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद इस सीट पर चुनाव कराना आवश्यक हो गया था। उनकी बेटी मृगांका सिंह उपचुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार हैं। उनका सीधा मुकाबला राष्ट्रीय लोक दल की तबस्सुम हसन से है।

कड़ी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में शिवसेना-:

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तबस्सुम का समर्थन कर रही हैं। उधर, महाराष्ट्र में सभी चार बड़ी पार्टियां- कांग्रेस, बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी पूरा दम लगा रही हैं क्योंकि इन उपचुनाव के नतीजों का असर भविष्य में देखने को मिल सकता है। यहां भंडारा-गोंदिया और पालघर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग है।

10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव-:

पलुस कादेगांव (महाराष्ट्र), नूरपुर (यूपी), जोकीहाट (बिहार), गोमिया और सिल्ली (झारखंड), चेंगानूर (केरल), अंपति (मेघालय), शाहकोट (पंजाब), थराली (उत्तराखंड) और मेहेशतला (पश्चिम बंगाल) विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं।

1)- क्यों खास है 2019 के लिए कैराना...?

(तबस्सुम हसन, रालोद v/s मृगांका सिंह, भाजपा)

उत्तर प्रदेश के लिए कैराना लोकसभा सीट राजनीतिक तौर पर अहम है क्योंकि यह माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में यह रणनीतिक भूमिका निभाएगा। राजधानी लखनऊ से करीब 630 किलोमीटर दूर स्थित कैराना लोकसभा सीट के तहत शामली जिले की थानाभवन, कैराना और शामली विधानसभा सीटों के अलावा सहारनपुर जिले की गंगोह और नकुड़ विधानसभा सीटें आती हैं। क्षेत्र में करीब 17 लाख मतदाता हैं जिनमें मुस्लिम, जाट और दलितों की संख्या अहम है।

2)- पालघर, महाराष्ट्र-:

(श्रीनिवास वनगा, शिवसेना v/s राजेंद्र गावित, भाज)

श्रीनिवास भाजपा के दिवंगत सांसद चिंतामण वनगा के बेटे हैं, लेकिन इस बार एनडीए से अलग हुई शिवसेना उन्हें अपने पाले में करने में कामयाब हो गई। तब भाजपा को राजेंद्र गावित को टिकट देना पड़ा। वो पहले कांग्रेस में थे। 2014 में इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार चिंतामण वनगा को 5 लाख 33 हजार 201 वोट मिले थे।

यह कुल मतदान का 53.7% था। उन्होंने बहुजन विकास अघाडी पार्टी के बलीराम सुकुर जाधव को 2 लाख 39 हजार 520 वोटों से शिकस्त दी थी। जाधव को 29.6% वोट मिले थे। कांग्रेस-एनसीपी ने 2014 में इस सीट से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था, लेकिन इस बार साझेदारी करके दामोदर शिंगदा को टिकट दिया है। वो कांग्रेस में रहे भाजपा उम्मीदवार राजेंद्र गावित के वोट काट सकते हैं।

3)- भंडारा-गोंदिया, महाराष्ट्र-:

(मधुकर कुकड़े, एनसीपी v/s हेमंत पाटले, भाजपा)

नाना पटोले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस सीट पर कांग्रेस का एनसीपी से समझौता हुआ है। माना जा रहा था कि कांग्रेस पटोले को टिकट देती तो एनसीपी का एक धड़ा उनका समर्थन नहीं करता। 2014 में यहां नाना पटोले को 6 लाख 6 हजार 129 वोट (50.6%) मिले थे। उन्होंने एनसीपी के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल को करीब डेढ़ लाख वोटों से शिकस्त दी थी।

4)- नगालैंड-:

(तोखेयो येपथोमी, पीडीए v/s सीए अपोक जमीर, एनपीएफ)

इस सीट पर सिर्फ दो ही उम्मीदवार हैं। राज्य की यह इकलौती लोकसभा सीट है।
इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस के समर्थन वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) और भाजपा के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के बीच है। तीन बार से इस सीट पर एनपीएफ को जीत मिली है।

इससे पहले इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था। 1998 के चुनाव में यहां कांग्रेस उम्मीदवार को 86.70% वोट और 1999 में 71.18% वोट मिले थे। इसके बाद 2004 के चुनावों में एनपीएफ ने कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया।


कमेंट करें