ख़ास रिपोर्ट

क्या 2018 में हम यह संकल्प लेंगे कि कोई जुनैद या पहलू खान नहीं मारा जाए!

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| दिसंबर 31 , 2017 , 21:21 IST

31 दिसंबर आ गया, और अगली सुबह हम एक नए कैलेंडर इयर में पहुंच जाएंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा 2017 में हमने ऐसी कई गलतियां की जिसे एक सभ्य नागरिक समाज कभी माफ नहीं कर सकता है। साल 2017 में देश में ऐसी कई घटनाएं हुई जो देश की सर्वधर्म समभाव और गंगा जमनी तहजीब की संस्कृति पर सवालिया निशान लगा गई। राजस्थान के राजसमंद की घटना पर क्या सोचा आपने। मथुरा जा रही ट्रेन में जुनैद की पीट-पीट कर हत्या क्यों उन्मादी भीड़ ने कर दी। ऐसे सवाल क्या आपके दिमाग पर चोट नहीं करते हैं।

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कभी गौ रक्षा के नाम पर तो कभी लव जिहाद के नाम पर हम इतने उन्मादी क्यों होते जा रहे हैं। समाज को बीमार राजनीति ने खांचों में बांट कर हमें गुस्सैल और उन्मादी बना रही है।

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ज़्यादातर लोग समाज और राजनीति की इस हालत को लेकर बेचैन हैं। बात किसी सरकार की नहीं है, यह बात कहीं भी घट सकती है। यह एक ऐसा उन्मादी आत्मविश्वास है जिसे हमारी बीमार राजनीति पैदा कर रही है। इसके बाद भी बहुत बड़ी तादाद में लोग इसके ख़तरे पहचान भी लेते हैं, वो दो समुदायों के साथ उसी रफ्तार से ज़िंदगी जीते रहते हैं, मगर कुछ हफ्तों के अंतराल पर कभी पहलू ख़ान को मार दिया जाता है, कभी उमर को, तो कभी जुनैद को। यह घटनाएं जब बार-बार लौटती हैं तब चिंता होती है। यह सनक कहां से आती है। सांप्रदायिकता का यह नया रूप है। लगातार बयान दो, बहस करो, ताकि कोई इसकी चपेट में आ जाए और मानव बम में बदल जाए। वो किसी को चलती ट्रेन में मार दे, किसी को गाय के नाम पर मार दे तो किसी को नारियल काटने वाले धारदार हथियार घेंती से मार दे।

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राजसमंद की घटना के आरोपी के चेहरे पर बीमार होती जा रही राजनीति के रंग नज़र आ रहे हैं। उसकी जगह हत्या के बाद का ख़ून सवार है जो ठहर चुका है. शंभुलाल रेगर एक मज़दूर मोहम्मद अफराज़ुल खान को धारदार हथियार से मारने लगता है। अफराज़ुल की किसी चीख से शंभुलाल को कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह मारने के बाद कैमरे की तरफ मुड़ता है, लव जिहाद पर भाषण देता है। उसके बाद लौट कर जाता और पेट्रोल छिड़कर जला देता है। यही वह तस्वीर है जो भारत के उन तमाम नागरिकों को परेशान कर रही है जिन्हें लगता है कि क्या इसके पीछे नफ़रत की वो राजनीति है जो दिन रात आम लोगों को परेशान करती जा रही है।

 

 

 

 

 


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