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सावधान! वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम हो सकता है खतरनाक, ये हैं इनके लक्षण

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 10 , 2018 , 20:25 IST

किसी भी स्त्री के लिए माँ बनने का सफर शारीरिक रूप से बहुत ही कठिन होता है लेकिन भावनात्मक रूप से यह बेहद सुखद रहता है। नौ महीने तक कई तरह के उतार चढ़ाव को पार करके एक नए जीवन को दुनिया में लाना बहुत ही आनंदप्रद होता है। ऐसे में यदि आप जुड़वा बच्चों के माता पिता बनते हैं तो आपकी खुशियां भी दोगुनी हो जाती है।

क्या होता है वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम

हर प्रेगनेंसी एक जैसी नहीं होती। जुड़वा बच्चों को जन्म देने का सफर बहुत ही कठिन होता है। जुड़वा बच्चों की माँ बनने वाली महिलाओं को अपने दोनों बच्चों के स्वास्थ्य की परवाह होती है। लेकिन जब बात एक बच्चे को हटाने की होती है तो वह किसी भी महिला के लिए बहुत ही दुखदायी होती है इसे वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है।

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यदि किसी स्त्री के गर्भ में जुड़वा बच्चे पल रहे हैं और कोई एक ही भ्रूण कार्यकाल पूरा कर पाता है और दूसरे का विकास ठीक से नहीं होता और गर्भ में ही उसकी मृत्यु हो जाती है इस अवस्था को वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम कहते हैं। कई महिलाओं को इस तकलीफ से गुज़रना पड़ता है जिसके बाद अपने दूसरे बच्चे को लेकर उनकी चिंता और भी बढ़ती जाती है। ऐसे में महिलाओं के दिमाग में कई तरह के सवाल उठते हैं जैसे क्या उनका दूसरा बच्चा पूरे नौ महीने का सफर ठीक से पूरा कर पाएगा या फिर उसके स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराता रहेगा।

कब पता लगा वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम के बारे में 

वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम का पता 1945 में चला था। गर्भावस्था के शुरूआती दौर में जब आपको यह पता चले कि आपके गर्भ में जुड़वा बच्चे पल रहे हैं फिर बाद में अल्ट्रासाउंड से आपको यह ज्ञात हो कि आपके गर्भ में केवल एक ही भ्रूण दिखाई दे रहा है और विकसित हो रहा है तो भी इसे वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम कहते हैं।

क्या कहती हैं शोध

एक शोध के अनुसार करीब 21 से 30 फीसदी मामलों में ऐसा होता है। पहले तिमाही में होता है यह सिंड्रोम ज़्यादातर वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम पहले तिमाही में होता है। गर्भावस्था में लगभग छठे या सातवें हफ़्ते में जब गर्भवती महिला का पहला अल्ट्रासाउंड होता है तब उससे इस बात की पुष्टि की जाती है कि उसके गर्भ में जुड़वा बच्चे हैं लेकिन कुछ समय बाद डॉक्टर को सिर्फ एक ही धड़कन सुनाई देती है जिससे यह साफ हो जाता है कि दूसरा भ्रूण जीवित नहीं है।

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संकेत और लक्षण

हालांकि वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम की असली वजह अभी तक साफ़ नहीं हुई है लेकिन इसके कुछ लक्षण और संकेत होते हैं जो इस सिंड्रोम की तरफ इशारा करते हैं।

ब्लीडिंग: जब जुड़वा बच्चों में से किसी एक का गर्भपात हो जाता है तो ऐसे में ब्लीडिंग सबसे आम लक्षणों में से एक है। जब महिला का गर्भपात होता है तो कुछ दिनों तक लगातार ब्लीडिंग होती है ऐसे में टिश्यू का भी नुकसान होता है।

क्रैम्प: सामान्य से ज़्यादा यूटेराइन में क्रम्पिंग गर्भपात का संकेत हो सकता है। इस तरह की क्रम्पिंग आपको मासिक धर्म के दौरान भी महसूस होती होगी। इसके अलावा आपको जी मिचलाना और उल्टी की भी शिकायत हो सकती है।

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श्रोणि के आस पास दर्द: वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम का यह सबसे बड़ा और मुख्य लक्षण है पीठ के नीचले हिस्से में हल्का लेकिन टीस मारने वाला दर्द गर्भपात की ओर इशारा कर सकता है।

बेबी बंप में संकुचन: जैसे जैसे शिशु का विकास होता है आपके पेट का आकर भी बढ़ता जाता है। ऐसे में यदि आपको अपने बेबी बंप में कोई संकुचन या दबाव महसूस हो तो यह वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है।

जीवित बच्चे के लिए यह सावधानी बरतनी चाहिए

गर्भ में एक बच्चे की मृत्यु और दूसरे के जीवित रहने का कारण प्लेसेंटा में या गर्भ नाल में असामान्यता हो सकती है या फिर बढ़ते भ्रूण में किसी प्रकार का विकार। यदि पहले तिमाही में ही आपने अपना एक बच्चा खो दिया है तो इसका कोई क्लीनिकल लक्षण आपको नहीं दिखाई देगा। पहले तिमाही में गर्भपात से बचने वाले जुड़वा बच्चे के लक्षण देख कर रोग का कारण आसानी से पता लगाया जा सकता है और उसका निदान किया जा सकता है।

हालांकि यह कुछ कारणों पर निर्भर करता है जिनकी वजह से दूसरे भ्रूण की मृत्यु हो गई हो। यदि एक जुड़वां बच्चे की मृत्यु दूसरे या तीसरे तिमाही में होती है तो ऐसी स्थिति में जीवित बच्चे को सेहत से जुड़ी समस्या आ सकती है। जीवित बच्चे को मस्तिष्क पक्षाघात की संभवाना ज़्यादा रहती है। अगर एक जुड़वां बच्चे की मृत्यु भ्रूण अवधि के बाद होती है तो ऐसे में बच्चे के टिश्यू, प्लेसेंटल टिश्यू और एमनीओटिक फ्लूइड के अंदर का पानी फिर से सोख लेता है।

फ़ीटस कम्प्रेसेस क्या होता है

प्रसव के दौरान जिस बच्चे की मृत्यु हुई होती है उसे फ़ीटस कम्प्रेसेस या फ़ीटस पेपिरेसियस कहते हैं। यदि भ्रूण की मृत्यु दूसरे या तीसरे तिमाही में होती है तो इस गर्भावस्था को हाई रिस्क की तरह माना जाता है और इसका इलाज किया जाता है। गर्भपात किसी भी महिला के लिए बहुत ही बुरा अनुभव होता है। अगर आपके जुड़वा बच्चों में से एक की मृत्यु हो गई है तो ऐसे में आप अपनी सेहत का ख़ास ध्यान रखें ताकि आपका दूसरा बच्चा सेहतमंद रहे और स्वस्थ रूप से जन्म ले। दूसरे बच्चे की सुरक्षा के लिए हो सकता है बच्चे के जन्म के आखिरी समय तक आपको पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी जाए।

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जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती होने के कुछ जोखिम

हाई रिस्क प्रेगनेंसी में महिलाओं की ख़ास देखभाल की जाती है ताकि होने वाली माँ और बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहे। हालांकि यदि आपसे यह कहा जाए कि आप जुड़वा बच्चों की माँ बनने वाली हैं और जिसमें कुछ जोखिम है तो ऐसे में आप घबराएं नहीं। ऐसे में मुमकिन है आप अपनी नियमित जांच करवाती रहें ताकि आपको बच्चे की सेहत के बारे में समय समय पर सभी जानकारी मिलती रहे।

गर्भपात: जुड़वा बच्चों के मामलों में गर्भावस्था के शुरुआत में ही गर्भपात का खतरा होता है। कई बार गर्भपात तब हो जाता है जब आपको गर्भवती होने की जानकारी भी नहीं होती।

गर्भावधि हाइपरटेंशन: जुड़वा बच्चों के गर्भ में पलने के कारण अक्सर महिलाओं को उक्त रक्तचाप की समस्या हो जाती है।

प्री एक्लेम्पसिया: यह स्वास्थ्य से जुड़ी वह समस्या है जो उक्त रक्तचाप के कारण प्रेगनेंसी के आखिरी समय में हो जाती है। ऐसे में आपको समय समय पर अपने पेशाब की जांच करवानी चाहिए साथ ही अपने रक्त चाप की भी।

एनीमिया: गर्भावस्था के दौरान ख़ास तौर पर जब आप जुड़वा बच्चों की माँ बनने वाली होती हैं तो सिस्टम में बहने वाली रक्त की मात्रा अधिक हो जाती है। साथ ही खून की कमी के कारण आपको एनीमिया हो सकता है।

ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टासिस: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन की अधिक मात्रा के कारण यह होता है और इसका प्रभाव सीधा असर लीवर पर पड़ता है।


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