ख़ास रिपोर्ट

CBI विवाद की वजह से माल्या-चौकसी केस की जांच अधर में, फैसला लेने वाला कोई नहीं!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
3445
| नवंबर 14 , 2018 , 18:33 IST

सीबीआई विवाद से न सिर्फ देश की केंद्रीय जांच एजेंसी की साख पर बट्टा लग गया है बल्कि सीबीआई के कई अहम जांच और फैसलों पर ग्रहण लग गया है। लंदन की कोर्ट 10 दिसंबर को विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में फैसला सुना सकता है लेकिन सीबीआई का प्रतिनिधित्व कौन करेगा ये साफ नहीं है। वजह है माल्या मामले को देखने वाले सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को सीवीसी ने छुट्टी पर भेज दिया है।

मेहुल चौकसी के सहयोगी दीपक कुलकर्णी को गिरफ्तार नहीं कर पा रही CBI

इतना ही नहीं मेहुल चौकसी मामले में इंटरपोल ने सीबीआई से चौकसी के उन आरोपों पर जवाब मांगा था लेकिन जवाब दाखिल नहीं हुआ। बड़े अफसरों की गैर-मौजूदगी की वजह से ही सीबीआई ने मेहुल चौकसी के सहयोगी दीपक कुलकर्णी को अभी तक हिरासत में नहीं लिया है।

सीबीआई के अंतरिम निदेशक के फैसले पर कोर्ट ने लगा रखा है रोक

वज़ह साफ है सीबीआई निदेशक समेत बड़े हुक्मरान छुट्टी पर भेजे जा चुके है और अंतरिम निदेशक कोई फैसला नहीं ले सकते। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। सीबीआई में खींचतान से सबसे बड़ी जांच एजेंसी की की अंदरूनी हालत खराब हो चुकी है। यहां तक सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी छुट्टी पर भेजे जाने से सीबीआई के कामकाज की पूरी व्यवस्था चरमराने लगी है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई के अंदर चल रही खींचतान का असर अब सीबीआई द्वारा की जा रही कई मामलों की जांच पर भी पड़ने लगा है।

आलोक वर्मा और अस्थाना दोनों भेजे जा चुके हैं छुट्टी पर

सीबीआई से जुड़े सूत्रों की मानें तो एजेंसी ने लंबित चल रहे मामलों पर किसी तरह का निर्णय न लेने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई के दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के छुट्टी पर भेजे जाने के बाद से ही अन्य अधिकारियों के समक्ष किसी तरह का निर्णय न लेने की स्थिति बनी हुई है। सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच चल रही तनातनी के बीच केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था। इस फैसले को आलोक वर्मा और अस्थाना ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

As 3

सीबीआई से जुड़े अधिकारी की मानें तो वरिष्ठ अधिकारियों के छुट्टी पर जाने का साफ तौर पर असर सीबीआई द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर पड़ रहा है। उनके अनुसार कई बड़े मामलों में सीबीआई पहले की तरह काम नहीं कर पा रही है। जबकि कई मामलों में अधिकारियों द्वारा मिलने वाली स्वीकृति का इंतजार है।

सीबीआई में भ्रष्टाचार के मामले के दर्ज होने में हो रही है कमी

सीबीआई में हालात इतने खराब है कि हर महीने भ्रष्टाचार के औसतन 36 मामले दर्ज करने वाली सीबीआई ने 22 अक्टूबर से अब तक सिर्फ 7 मामले दर्ज किया है। वज़ह कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का केंद्रीय सतर्कता आयोग( सीवीसी) जांच कर रहा है। हालांकि सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है। लेकिन सुनवाई सोमवार को होगी तभी ये साफ होगा कि क्या डिरेक्टर आलोक वर्मा और अस्थाना का भविष्य क्या होगा। कौन सीबीआई में वापस आएगा और कौन बाहर जाएगा। लेकिन तब तक सीबीआई अपनी साख और वज़ूद के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बाट जोहता दिख रहा है।

 

 


कमेंट करें