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आरुषि-हेमराज मर्डर केसः हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC पहुंची सीबीआई

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 8 , 2018 , 22:01 IST

आरुषि-हेमराज मर्डर केस में तलवार दंपती के खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बरी किए गए तलवार दंपति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिहाई को चुनौती दी है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के निर्णय को रद्द करते हुए डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार को निर्दोष करार दिया था।

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलवार दंपती को इस मामले में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री जहां से चली थी पिछले साल अक्टूबर में वहीं पहुंच गई जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया। इस तरह देखा जाए तो ये मर्डर मिस्ट्री फिर उलझ गई।

न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्र की पीठ ने आरुषि तलवार और घरेलू सहायक हेमराज की हत्या के मामले में गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत के निर्णय के खिलाफ तलवार दंपति की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था। तलवार दंपति को 1,418 दिन जेल में काटने के बाद रिहा कर दिया गया।

विशेष सीबीआई अदालत ने आरुषि और हेमराज की हत्या के मामले में तलवार दंपति को 26 नवंबर, 2013 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों और रिकार्ड में दर्ज साक्ष्यों के मुताबिक तलवार दंपति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इस तरह से उसने तलवार दंपति की आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया।

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उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच पर भी उठे थे सवाल -

आरुषि की हत्या के बाद चूंकि घर से हेमराज गायब था इसलिए तत्काल उसी पर शक की सूई घूमी लेकिन बाद में जब उसका शव तलवार के घर की छत से बरामद हुआ तो मामला फिर से उलझ गया। किरकिरी होती देख मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया गया।

सीबीआई ने कहा था कि तलवार का रोल नहीं-

सीबीआई ने मामले की छानबीन के दौरान इस मामले में घरेलू नौकर पर ही संदेह जाहिर किया। सीबीआई ने कहा कि वारदात को खुखरी जैसे हथियार से अंजाम दिया गया है और फिर तलवार के नौकर कृष्णा से पूछताछ हुई और एक महीने बाद 13 जून को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फिर सीबीआई ने एक के बाद एक बाकी नौकरों को भी गिरफ्तार किया। लेकिन इसमें सीबीआई को खास सफलता नहीं मिली और नौकरों को जमानत मिल गई।

छानबीन के बाद सीबीआई ने तलवार दंपती पर संदेह जताया लेकिन कहा कि चूंकि केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है ऐसे में साक्ष्यों की कड़ियां तलवार दंपती के खिलाफ नहीं जुटती हैं और फिर सीबीआई ने मामले में स्पेशल कोर्ट के सामने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी और कहा कि मामले को बंद कर दिया जाए। हालांकि स्पेशल कोर्ट ने पेश तथ्यों के आधार पर कहा कि जो साक्ष्य हैं वह पुख्ता हैं और मामले में तलवार दंपती को बतौर आरोपी समन जारी कर दिया।

हाई कोर्ट से बरी होने के बाद सवाल फिर कायम-

निचली अदालत ने तलवार दंपती को आरुषि और हेमराज की हत्या में उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसे तलवार दंपती ने हाई कोर्ट में चुनौती दी और हाई कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा था कि परिस्थितियों और रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्यों के मुताबिक तलवार दंपती को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।


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