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SC से केंद्र ने कहा, अपराध की श्रेणी में रखे जाएं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स

दीपक गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 12 , 2018 , 16:00 IST

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि विवाहेत्तर संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। एक याचिकी की सुनवाई करते हुए कोर्ट से केंद्र से जवाब मांगा था। केंद्र ने अपने जवाब में कहा है कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स को अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर शादी की पवित्रता पर आंच आएगी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कि यदि इस कानून में नरमी बरती गई तो इसका भारतीय संस्कृति और शादी की पवित्रता पर बुरा असर पड़ेगा।

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एडल्टरी यानी विवाहेत्तर संबंधो के मामलों में महिलाओं और पुरुषों को समान सजा देने की मांग से जुड़ी एक याचिका पर  केंद्र का यह जवाब आया है। पिछले साल CJI दीपक मिश्रा ने एडल्टरी से जुड़ी IPC की धारा 497 में की वैधता पर जवाब माँगा था। बेंच ने कहा था का कि यह कानून काफी पुराना लगता है और इसमें महिलाओं को पुरुष के बराबर नहीं माना गया है।

आपको बता हदें कि धारा 497 एडल्टरी यानी शादी से बाहर संबंधों से जुड़ा है। इसके तहत यदि एक पुरुष किसी और की पत्नी से संबंध बनाता है तो वह अपराधी माना जाएगा और उसे 5 साल तक की सजा हो सकती है। जबकि पत्नी को न ही आरोपी माना जाएगा और न ही उसे कोई सजा होगी।Extra-marital-affair___1

केरल के रहने वाले जोसेफ शीने ने SC में अपनी PIL में कहा 'क्या एक रिश्ते में पुरुष ही एकमात्र बहकाने वाला हो सकता है? क्या एक महिला एडल्टरी में लिप्त नहीं हो सकती है? क्या किसी की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर सिर्फ पुरुष को ही जेल होनी चाहिए? क्या पति से रिश्ते की सहमति मिलने के बाद प्रेमिका को बरी किया जा सकता है? और क्या शादी से बाहर रिश्ते के लिए पति की सहमति एक महिला को महज एक इस्तेमाल की वस्तु नहीं बना देता है?'

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केंद्र सरकार ने कहा कि IPC की धारा 497 और CPC की धारा 198(2) को खत्म करने का सीधा असर भारत की संस्कृति पर पड़ेगा जोकि शादी की संस्था और उसकी पवित्रता पर जोर देता है। सरकार के जवाब में कहा गया है कि 497 एक जरूरी प्रावधान है और उसे हटाया नहीं जा सकता है। सरकार ने लिखा ने कहा कि IPC की धारा 497 और CPC की धारा 198(2) को खत्म करने से एडल्टरी अपराध की श्रेणी से बाहर आ जाएगी जिससे समाज के तानेबाने को बड़ा नुकसान होगा।


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