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जामिया मिलिया इस्लामिया का अल्पसंख्यक दर्जा गलत- केंद्र सरकार

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 21 , 2018 , 16:12 IST

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे का विरोध किया है।

सरकार ने नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स (एनसीएमईआई) के उस फैसले पर असहमति जताई है, जिसमें एनसीएमईआई ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया था।

केन्द्र सरकार ने कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में अजीज बाशा बनाम भारत गणराज्य केस (साल 1968) का हवाला देते हुए बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो यूनिवर्सिटी संसद एक्ट के तहत शामिल है, उसका अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं माना जा सकता। जामिया भी संसद एक्ट के तहत आती है और केन्द्र सरकार इसे फंड देती है तो इसे भी अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

हलफनामे में ये भी कहा गया है कि ऐसा जरुरी नहीं है कि जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के बोर्ड का निर्वाचन होता हो और ये भी जरुरी नहीं है कि इसमें मुस्लिम धर्म को मानने वालों की हीं अधिकता हो। इस संस्थान को अल्पसंख्यकों द्वारा भी स्थापित नहीं किया गया है ऐसे में जामिया के अल्पसंख्यक संस्थान होने का सवाल ही नहीं उठता।

आपको बता दें कि साल 2011 में एनसीएमईआई ने कहा था कि जामिया की स्थापना मुस्लिमों द्वारा, मुस्लिमों के फायदे के लिए की गई थी और यह संस्थान अपनी मुस्लिम पहचान को कभी नहीं छोड़ेगा।

इसके बाद जामिया ने एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों को आरक्षण देने से इंकार कर दिया था वहीं मुस्लिम छात्रों के लिए हर कोर्स में आधी सीट आरक्षित कर दी थी। 30 प्रतिशत सीट जहां मुस्लिम छात्रों के लिए, वहीं 10 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं के लिए और 10 प्रतिशत मुस्लिम पिछड़ा वर्ग मुस्लिम अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दी गई थी।

इस फैसले के विरोध में हाईकोर्ट में 5 याचिकाएं दाखिल की गईं थी। इस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा तो तत्कालीन यूपीए सरकार के मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर एनसीएमईआई के फैसले का समर्थन किया था।


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