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सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट के लिए राम सेतु को नहीं पहुंचाएंगे नुकसान: केंद्र

आईएएनएस | 0
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| मार्च 16 , 2018 , 19:30 IST

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उसने भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच नौवहन को सुगम बनाने के लिए शुरू की गई सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए राम सेतु को राष्ट्रहित में नष्ट नहीं करेगी।

केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय की ओर से प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ को सूचित किया गया कि उसने पूर्व की सेतुसमुद्रम समुद्री मार्ग परियोजना का विकल्प तलाशने का फैसला किया है। 

केंद्र ने अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कहा, "भारत सरकार राष्ट्रहित में रामसेतु को बगैर क्षति पहुंचाए पूर्व की सेतुसमुद्रम समुद्री मार्ग परियोजना का विकल्प ढूंढना चाहती है।"

सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनंद केंद्र की ओर उपस्थित हुई थी। उन्होंने कहा कि सेतुसमुद्रम परियोजना के विरूद्ध भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की जनहित याचिका (पीआईएल) को अब खारिज किया जा सकता है। 

स्वामी ने पीआईएल दाखिल करते हुए कहा था कि राम सेतु को क्षति नहीं पहुंचाना चाहिए। 

यूपीए सरकार के वक्त 2005 में इस प्रोजेक्ट का ऐलान किया गया था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत करीब ढाई हजार करोड़ थी, जो कि अब 4 हजार करोड़ तक बढ़ गई है। इसके तहत बड़े जहाजों के आने-जाने के लिए करीब 83 किलोमीटर लंबे दो चैनल बनाए जाने थे।

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इसके जरिए जहाजों के आने-जाने में लगने वाला वक्त 30 घंटे तक कम हो जाएगा। इन चैनल्स में से एक राम सेतु जिसे एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है, से गुजरना था। अभी श्रीलंका और भारत के बीच इस रास्ते पर समुद्र की गहराई कम होने की वजह से जहाजों को लंबे रास्ते से जाना पड़ता है।


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