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नहाय खाए से शुरू हुआ छठ पूजा, सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं छठ के ये सुपरहिट गाने

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| नवंबर 11 , 2018 , 15:13 IST

कार्तिक महीने में मनाए जाने वाले छठ पूजा त्योहार का बेहद महत्व है। दिवाली के छह दिन बाद आने वाले छठ पूजा आज से शुरू हो गई है। नहाय-खाय की विधि के साथ चार दिनों के छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। इसमें भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। उत्तर भारतीय राज्यों बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में विशेषकर इस त्योहार को मनाया जाता है। सूर्य को समर्पित छठ पूजा का त्योहार बेहद स्वच्छता, नियम और विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। ये पूजा पुरुष और स्त्री दोनों समान रूप से कर सकते हैं। यह आस्था और श्रद्धा का पर्व है।

ऐसे मनाया जाता है चार दिनों का छठ पूजा त्योहार

कार्तिक शुक्ल षष्टि के दिन से ये पूजा पूरे विधि-विधान से शुरू हो जाती है। इस बार ये पूजा 13 नवंबर से है। व्रत के पहले दिन यानि कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाए-खाए का नियम होता है जिसका बड़े ही कड़ाई से पालन किया जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले पुरी शुद्धता के साथ बनाए हुए आहार का सेवन करते हैं। इसके दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी के दिन खरना पूजा विधि का पालन किया जाता है। इस दिन रात के सायं काल के समय पूरी आत्मशुद्धता से गुड़-दूध की खीर और पूड़ी बनाकर छठ माता को भोग लगाया जाता है। इसके बाद इस प्रसाद को घर के सदस्यों और ब्रह्मणों में बांटा जाता है।

इसके अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल षष्ठी के शाम में घर पर पकवान बनाए जाते हैं जिसमें ठेकुआ खास होता है। इसके बाद शाम के समय इस पकवान के साथ फल-फूल एक डलिए में सजाकर नदी के घाट तक ले जाया जाता है जहां डूबते हुए सूरज को पहला अर्घ्य दिया जाता है।
इसके अगले दिन यानी सप्तमी को सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त में भगवान सूर्य के समक्ष नदी के तट पर अर्घ्य दिया जाता है। यहां पर सभी व्रती (पुरुष या स्त्री) पकवान, नारियल और फलदान को लेकर नदी तट पर एकत्र होते हैं। यहां अहले सुबह उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने की परंपरा है। दूसरे अर्घ्य की समाप्ति के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है। इसी दिन को पारण कहा जाता है।

इस पर्व में छठ गीतों का भी बेहद महत्व होता है। इसके अलावा घाट जाते समय दंडवत प्रणाम करने की प्रक्रिया भी खास होती है। इसमें श्रद्धालु सूर्य देवता को नमस्कार करते हुए जमीन पर दंडवत लेटते हुए घर से नदी तक की दूरी तय करते हैं। कहते हैं ऐसा करने से मन में मांगी हुई मुराद पूरी होती है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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