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छठ पूजा: इस साल बन रहे हैं कई शुभ संयोग, पढ़ें पूजा विधि और छठ कथा

राजू झा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 10 , 2018 , 16:06 IST

महापर्व छठ कल यानी 11 नवबंर से शुरू हो रहा है। चार दिनो तक चलने वाला छठ के पहले दिन नहाय खाए, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन सुबह का अर्घ्य के साथ 14 नवंबर तक चलने वाला है।

बता दें कि छठ पूजा में सूर्य को पहला अर्घ्य 13 नवंबर को दिया जाएगा। बिहार में यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाते है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल में भी छठी मइया को पूजा मनाया जाता है। छठ पूजा के दिन घर के लगभग सभी सदस्य (बच्चों और बुजुर्गों को छोड़कर) व्रत रखते हैं।

ऐसा भी मान्यता है कि छठ का व्रत रखने से संतान की प्राप्ति होती है और बच्चों से जुड़े कष्टों का निवारण होता है। इसी के माना जाता है कि छठी मइया का व्रत रखने से सूर्य भगवान की कृपा बरसती है। छठ पूजा से जुड़ी खास बातों के बारे में यहां जानिएं...

छठ पूजा इस बार कब है?

दिपावली के छठे दिन यानी कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाता है। छठी मइया की पूजा की शुरुआत चतुर्थी को नहाए-खाय से होती है। इसके अगले दिन खरना या लोहंडा (इसमें प्रसाद में गन्ने के रस से बनी खीर दी जाती है)। षष्ठी (13 नवंबर) को शाम और सप्तमी (14 नवंबर) सुबह को सूर्य देव को अर्घ्य देकर छठ पूजा की समाप्ति की जाती है. इस बार छठ पूजा 11 से 14 नवंबर तक है।

छठ पूजा की सामग्री

पहनने के लिए नए कपड़े, दो से तीन बड़ी बांस से टोकरी, सूप, पानी वाला नारियल, गन्ना, लोटा, लाल सिंदूर, धूप, बड़ा दीपक, चावल, थाली, दूध, गिलास, अदरक और कच्ची हल्दी, केला, सेब, सिंघाड़ा, नाशपाती, मूली, आम के पत्ते, शकरगंदी, सुथनी, मीठा नींबू (टाब), मिठाई, शहद, पान, सुपारी, कैराव, कपूर, कुमकुम और चंदन आदि। ऐसा भी माना जाता है कि जितनी शक्ति हो उतना से भी आप छठ की पूजा कर सकते है।

छठी मइया का प्रसाद

छठी मइया का प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर, खजूर, चावल का लड्डू और सूजी का हलवा आदि छठ मइया को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

छठी मइया की पूजा विधि

- नहाय-खाय के दिन सभी वर्ती सिर्फ शुद्ध आहार का सेवन करें।
- खरना या लोहंडा के दिन शाम के समय गुड़ की खीर और पुड़ी बनाकर छठी माता को भोग लगाएं। सबसे पहले इस खीर - वर्ती खाएं बाद में परिवार और ब्राह्मणों को दें।
- छठ के दिन घर में बने हुए पकवानों को बड़ी टोकरी में भरें और घाट पर जाएं।
- घाट पर ईख का घर बनाकर बड़ा दीपक जलाएं।
- व्रती घाट में स्नान कर के लिए उतरे और दोनों हाथों में डाल को लेकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
- सूर्यास्त के बाद घर जाकर परिवार के साथ रात को सूर्य देवता की ध्यान और जागरण करें। इस जागरण में छठी मइया के गीतों (Chhathi Maiya Geet) को बजाएं।
- सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सारे वर्ती घाट पर पहुंचे. इस दौरान वो पकवानों की टोकरियों, नारियल और फलों को साथ रखें।
- सभी वर्ती उगते सूरज को डाल पकड़कर अर्घ्य दें।
- छठी की कथा सुनें और प्रसाद का वितरण करें।
- आखिर में सारे वर्ती प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।

छठ पूजा के दौरान वर्तियों के लिए नियम

1. वर्ती छठ पर्व के चारों दिन नए कपड़े पहनें। महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनें।
2. छठ पूजा के चारों दिन वर्ती जमीन पर चटाई पर सोएं।
3. वर्ती और घर के सदस्य भी छठ पूजा के दौरान प्याज, लहसुन और मांस-मछली ना खाएं।
4. पूजा के लिए बांस से बने सूप और टोकरी का इस्तेमाल होता है।
5. छठ पूजा में गुड़ और गेंहू के आटे के ठेकुआ, फलों में केला और गन्ना ध्यान से रखें।

छठ मइया का पूजा मंत्र

ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं |
अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम् ||

छठी मइया की कथा

छठी मइया की पूजन विधि के दौरान कथा सुना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम का एक राजा था. उनकी पत्नी का नाम था मालिनी। दोनों की कोई संतान नहीं थी। इस बात से राजा और रानी दोनों की दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति के लिए राजा ने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। यह यज्ञ सफल हुआ और रानी गर्भवती हुईं।

लेकिन रानी की मरा हुआ बेटा पैदा हुआ। इस बात से राजा और रानी दोनों बहुत दुखी हुए और उन्होंने संतान प्राप्ति की आशा छोड़ दी। राजा प्रियव्रत इतने दुखी हुए कि उन्होंने आत्म हत्या का मन बना लिया, जैसे ही वो खुद को मारने के लिए आगे बड़े षष्ठी देवी प्रकट हुईं।

षष्ठी देवी ने राजा से कहा कि जो भी व्यक्ति मेरी सच्चे मन से पूजा करता है मैं उन्हें पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं। यदि तुम भी मेरी पूजा करोगे तो तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। राजा प्रियव्रत ने देवी की बात मानी और कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि के दिन देवी षष्ठी की पूजा की। इस पूजा से देवी खुश हुईं और तब से हर साल इस तिथि को छठ पर्व मनाया जाने लगा।


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