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PCOS से पीड़ित महिला के बच्चों को ऑटिज्म का खतरा, जानें सेक्स हार्मोन से इसका कनेक्शन

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 8 , 2018 , 20:26 IST

एक रिसर्च के मुताबिक पीसीओएस (PCOS) उच्च टेस्टोस्टेरोन की वजह से होने वाला एक विकार है,जिसके चलते समय से पहले युवावस्था, अनियमित माहवारी और शरीर पर अतिरिक्त बाल होने लगते हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) से पीड़ित महिलाओं के पैदा होने वाले बच्चों में ऑटिज्म (Autism) होने का खतरा बना रहता है। 

पिछले अध्ययनों से पता चला था कि ऑटिस्टिक (Autistic) बच्चों में टेस्टोस्टेरोन समेत 'सेक्स स्टीरॉयड' हार्मोन के स्तर बढ़ जाते हैं जो बच्चे के शरीर और मस्तिष्क को समय से पहले ही युवावस्था की ओर जाने लगते हैं।

हार्मोन के बढ़ते स्तर पर बहस करते हुए शोध दल ने पाया कि इसका एक कारण जन्म देने वाली मां का विकार हो सकता है। एक निष्कर्ष बताते हैं कि अगर मां में सामान्य से अधिक टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) होता है, जैसा कि पीसीओएस वाली महिलाओं के मामले में देखा जाता है, तो कुछ हार्मोन गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा को पार कर जाते हैं जिससे भ्रूण का इस हार्मोन से अधिक संपर्क हो जाता है और बच्चे के मस्तिष्क का विकास बदल जाता है।

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ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से एड्रियाना चेरस्कोव बताती हैं, "यह निष्कर्ष उस सिद्धांत को और मजबूत करता है, जिसमें बताया गया है कि ऑटिज्म न केवल जीनों के कारण होता है, बल्कि इसका टेस्टोस्टेरोन जैसे जन्मपूर्व सेक्स हार्मोन भी कारण हो सकते हैं।"

इस शोध के लिए अध्ययनकर्ताओं ने पीसीओएस पीड़ित 8,588 महिलाओं के आंकड़ों का अध्ययन किया था।

कैसे जानें कि आपको पीसीओएस है?

दिखाई देनेवाले शर्मिंदगी भरे लक्षण, जैसे-ठुड्डी पर बाल और मुहांसों से लेकर, चिंताजनक लक्षण, जैसे-पीरियड्स का न आना या अनियमित पीरियड्स, पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं, जो आपकी सेहत की धज्जियां उड़ा सकते हैं। डाइबिटीज़, यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारी दे सकते हैं।

आप कैसे पता लगाएंगी कि आपको पीसीओएस है?

पीसीओएस लाइलाज है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। महिलाओं के लिए यह बिमारी शर्मिंदगी का कारण बन जाती है, क्योंकि इसमें शरीर पर अत्यधिक बाल उग जाते है। वज़न बढ़ने तक की समस्या होती है। चिंता की बात तो यह होती है कि पीसीओएस पूरे देश में तेजी से बढ़ रहा है। ख़ासकर भारत में यह प्रजनन आयु वर्ग में काफी तेज़ी से फैल रहा है।

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ये है पीसीओएस का लक्षण

अनियिमित हैं पीरियड्स: गायनाकोलॉजिस्ट के अनुसार ज़्यादातर महिलाओं को पीसीओएस होने का पता तब लगता है, जब उनका मासिक चक्र बेहद अनियमित (साल में चार पीरियड्स से कम) हो जाता है या फिर बिल्कुल ही बंद हो जाता है।

जल्दी-जल्दी वैक्सिंग के लिए जाना: ऐसा दिखनेवाले लक्षण जैसे हर्सूटिज़्म को झेलना कोई मज़ाक की बात नहीं है, लेकिन ये लक्षण पीसीओएस को पहचानना सरल बनाते हैं। जिसके बाद आप इसका इलाज कराकर, इसे नियंत्रित कर सकती हैं,’’ यह भी याद रखें कि सिर के बालों का झड़ना भी पीसीओएस का एक लक्षण है।

एक्सरसाइज़ करने के बावजूद वज़न का बढ़ना: हर बार वज़न मशीन के मनचाहा परिणाम न देने से परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि आपको इसके पैटर्न पर ग़ौर करना चाहिए। ‘‘उदाहरण के लिए यदि पहले से ही आपका वज़न ज़्यादा है (आपके क़द के अनुसार), आपको पीसीओएस होने की संभावना बढ़ जाती है। और यदि आप पाती हैं कि स्वस्थ खानपान और व्यायाम के बावजूद आपका वज़न घटने के बजाय बढ़ रहा है तो आपको निश्चित तौर पर डॉक्टर से मिलने की ज़रूरत है। यह ज़रूरी नहीं कि यह पीसीओएस ही हो-लेकिन यह कोई अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, जैसे हाइपरथाइरॉडिज़्म, स्ट्रेस, डिप्रेशन, किसी दवा का साइड-इफ़ेक्ट या सिर्फ़ जीवनशैली से जुड़ी कोई आम समस्या।

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मुहांसों से परेशान होना: ज़्यादातर महिलाओं को त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं, ख़ासतौर पर पीरियड्स के वक़्त मुहांसों का आना। लेकिन यदि पीरियड्स में देरी होने से आपको बहुत मुहांसे होते हैं तो अपनी गायनाकोलॉजिस्ट या डर्मैटोलॉजिस्ट से मिलें। मुहांसे और ऑयली त्वचा एंड्रोजन द्वारा होनेवाली हार्मोनल समस्या का परिणाम हैं। ‘‘मस्सों या त्वचा के गहरे हिस्सों पर ध्यान दें, विशेषकर स्तनों के नीचे के हिस्सों, बगलों, जांघों के अंदरूनी हिस्सों पर।

अक्सर उदास महसूस रहना: निराशा, बेचैनी, थकावट और अनिद्रा के कारण अज्ञात हो सकते हैं, लेकिन यदि इसके साथ अनियमित पीरियड्स की समस्या है तो ये पीसीओएस के लक्षण हो सकते हैं। ‘‘हार्मोन्स काफ़ी ताक़तवर होते हैं और शरीर के अंदर कई चीज़ों को नियंत्रित करते हैं। इसीलिए हार्मोनल स्तर में किसी भी प्रकार का असंतुलन कई प्रकार की गड़बड़ियों का संकेत हो सकता है।

आपको बता दें कि फ़र्टलिटी साइंस ऐंड रिसर्च जरनल में वर्ष 2014 में इंडियन फ़र्टलिटी सोसायटी द्दारा प्रकाशित एक लेख के अनुसार, भारत में प्रजनन संबंधी उम्र की हर पांच में से एक महिला और हर पांच में से दो किशोरियां पीसीओएस से पीड़ित हैं। सर्वेक्षणों के मुताबिक़, भारत में पीसीओएस के मामले 22 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। जो कि विकसित देशों के मुक़ाबले बहुत ज्यादा है। लेकिन गायनाकोलॉजिस्ट्स का मानना है कि कई छिपे हुए मामलों के भी पार जा सकता है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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