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चीन ने बनाई हाइपरसोनिक मिसाइल, अमेरिका-इंडिया तक है रेंज में!

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 2 , 2018 , 22:49 IST

 

चीन का नया हाइपरसॉनिक बलिस्टिक मिसाइल न सिर्फ अमेरिका के रक्षा क्षेत्र के लिए चुनौती होगा बल्कि यह जापान और भारत के मिलिटरी टारगेट को भी प्रभावित करने में सक्षम है। तोक्यो स्थित द डिप्लोमैट मैगजीन ने चाइना में पिछले साल के अंत में दो मिसाइलों के परीक्षण की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' में मंगलवार को यह रिपोर्ट आई है।

द डिप्लोमैट की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से 'द डिप्लोमैट' ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के रॉकेट फोर्स ने 1 नवंबर को पहला और उसके दो सप्ताह बाद दूसरा टेस्ट किया था। दोनों ही परीक्षण सफल रहे और DF-17 2020 के करीब ऑपरेशनल हो पाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को इस पर किसी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा कि इसके लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क करना चाहिए। पारंपरिक बलिस्टिक सिस्टम की तुलना में एचजीवी वॉरहेड ज्यादा तेजी से कम ऊंचाई वाले और ट्रैक न किए जाने वाले इलाके में जा सकता है।

1400 किलोमीटर तक उड़ा मिसाइल

DF-17 टेस्ट मिसाइल जिउक्वॉन सेंटर से लॉन्च किया गया और ट्रायल के दौरान यह करीब 1400 किलोमीटर तक उड़ा। चीन की सरकारी मीडिया ने अक्टूबर में एचजीवी टेक्नॉलजी का जिक्र किया था। पेइचिंग के मिलिटरी झोउ चेनमिंग ने कहा कि एचजीवी टेक्नॉलजी विश्व की तीन परमाणु शक्तियां चीन, अमेरिका और रूस के बीच परमाणु रणनीति का हिस्सा बन चुका है।

'द डिप्लोमैट' का रिपोर्ट यहां पढ़ें- Introducing the DF-17: China's Newly Tested Ballistic Missile Armed With a Hypersonic Glide Vehicle

अमेरिका, जापान और भारत के लिए खतरा

झोउ ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा, 'पारंपरिक बलिस्टिक मिसाइल की तुलना में एचजीवी को मार गिराना ज्यादा कठिन है। अमेरिका, जापान और भारत को चीन के एचजीवी टेक्नॉलजी में किए गए काम को लेकर चिंतित होने की जरूरत है क्योंकि यह लक्ष्य तक जल्दी से पहुंच जाता है। जापान के सैन्य अड्डे और भारत के परमाणु रिएक्टर्स इसके टारगेट हो सकते हैं।

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इधर, पीएलए के सेकंड आर्टिलरी कॉर्प्स के पूर्व सदस्य सॉन्ग झोंगपिंग ने बताया कि एचजीवी के वॉरहेड डीएफ-41 के साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं जिनकी क्षमता 12,000 किलोमीटर है। यह एक घंटे के भीतर अमेरिका के किसी भी हिस्से को हिट कर सकता है। मकाऊ के मिलिटरी ऑब्जर्वर ऐंटनी वॉन्ग डॉन्ग ने बताया कि एचजीवी का इस्तेमाल अमेरिका के ऐंटी मिसाइल सिस्टम THAAD को नष्ट करने के लिए भी किया जा सकता है जिसे फिलहाल नॉर्थ कोरिया के हमले से बचने के लिए साउथ कोरिया में तैनात किया गया है।


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