नेशनल

भारत का बढ़ा टेंशन, म्यांमार में बंदरगाह बनाएगा चीन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1491
| नवंबर 9 , 2018 , 21:01 IST

चीन हमेसा से ही भारत के लिए चिंता का विषय बनता रहा है, समय समय पर चीन अपने हरकतों से भारत को चकमा देते रहा है। चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ड ऐंड रोड परियोजना (BRI) भारत के लिए लगातार चिंता का विषय बनती रही है। BRI की मदद से चीन अक्सर पड़ोसी देशों के साथ मिल कर लगातार नई रणनीतिक चुनौतियां पेश कर रहा है। और अब एक बार फिर भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है।

चीन यह बंदरगाह म्यांमार के क्याप्यू शहर में बनाएगा


मीडिया में आ रही खबरों की माने तो चीन और म्यांमार के बीच एक समझौता हुआ है। चीन अब म्यांमार में अरबों डॉलर खर्ज कर बंदरगाह बनाने की तैयारी कर रहा है। यह बंदरगाह म्यांमार के क्याप्यू शहर में बनाया जाएगा जो बंगाल की खाड़ी से लगा हुआ है। भारत के लिए यह बंदरगाह इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि इससे पहले चीन भारत के पड़ोसी देशों में दो बंदरगाह और बना चुका है। BRI के तहत बनने वाले म्यामांर के बंदरगाह के लिए पेइचिंग और नैप्यीडॉ (म्यांमार की राजधानी) के बीच गुरुवार को डील साइन कर दी गई है। चीन पहले से ही पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह बना रहा है। इसके अलावा श्रीलंका के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह पर 99 साल की लीज पर चीन के पास ही है।

बंग्लादेश के चटगांव में भी एक बंदरगाह को वित्तीय मदद कर रहा है चीन


चीन बंग्लादेश के चटगांव में भी एक बंदरगाह को वित्तीय मदद प्रदान कर रहा है। अपने पड़ोस में चीन द्वारा तैयार किए जा रहे बंदरगाह को भारत हिंद महासागर में प्रभुत्त स्थापित करने की रणनीति के रूप में देख रहा है। हालांकि म्यांमार भी चीन के बढ़ते निवेश को लेकर चिंतित है औरप कुछ प्रोजेक्ट पर नियंत्रण स्थापित किया गया है।

इस प्रोजेक्ट में चीन का निवेश 70 फीसदी है


इसके अलावा चीन की सरकारी मीडिया की माने तो, उनका कहना है कि, म्यांमार से बंदरगाह बनाने को लेकर हुई यह डील BRI के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट की माने तो इस प्रोजेक्ट में चीन का निवेश 70 फीसदी है जबकि म्यांमार का निवेश 30 फीसदी होगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रॉजेक्ट पर 2015 से ही वार्ता रुकी हुई थी। इस वजह से BRI की आलोचना हो रही थी और कुछ विदेशी आलोचक इसे चीन के 'लोन ट्रैप' के रूप में भी ले रहे थे।

बता दें कि BRI परियोजना में छोटे देशों को कथित तौर पर लोन के जाल में फंसाने की कोशिश को लेकर चीन की आलोचना हो रही है। चीन समुद्री मार्ग से सटे और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों को कर्ज देकर बंदरगाह जैसे विशाल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। चीन के कर्जे की वजह से कुछ देशों में राजनीतिक संकट भी पैदा होने के आरोप लग रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण श्रीलंका है। श्रीलंका में भी चीन ने भारी निवेश कर रखा है।

टैग्स: Gwadar port |#china|Myanmar|BRI

कमेंट करें