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सत्ता के संभालने के बाद पहली बार विदेश दौरे पर चीन गया उत्तर कोरिया का तानाशाह

icon कुलदीप सिंह | 0
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| मार्च 27 , 2018 , 14:11 IST

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के चीन में होने की ख़बर है। चीनी मीडिया के हवाले से इस तरह की ख़बर प्रचारित की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो 2011 में सत्ता संभालने के बाद देश के बाहर किम जोंग उन का ये पहला दौरा होगा।


चीन का जवाब- किम जोंग उन के दौरे की जानकारी नहीं 


किम जोंग उन के चीन दौरे पर चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट अखबार का दावा है कि उन के चीन दौरे को देखते हुए चीन-नॉर्थ कोरिया बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बीजिंग के सरकारी दियाओयुताई गेस्टहाउस में जहां विदेशी प्रतिनिधिमंडल रुकता है, वहां भी सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। यहां सड़कों को भी बंद कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है, "संकेतों की मानें तो कोई हाईप्रोफाइल शख्स चीन दौरे पर गया है।"

 

चीन और उत्तर कोरिया की दोस्ती

चीन और उत्तर कोरिया ने 1961 में पारस्परिक सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि में कहा गया है कि अगर दोनों देशों में से किसी पर हमला होता है तो वे एक दूसरे को तत्काल मदद करेंगे। इसमें सैन्य सहयोग भी शामिल है। इस संधि में यह भी कहा गया है कि दोनों शांति और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना है।

कुछ चीनी विशेषज्ञों का अब मानना है कि परमाणु कार्यक्रम के साथ चीन को उत्तर कोरिया के साथ हुई संधि के साथ नहीं रहना चाहिए. लेकिन चीन कोरियाई प्रायद्वीप में उत्तर कोरिया को हाथ से जाने नहीं देना चाहता है. चीन को लगता है कि कोरियाई प्रायद्वीप में किसी का प्रभुत्व नहीं बढ़े।

दक्षिण कोरिया के साथ चीन का राजनयिक संबंध 25 सालों से ज़्यादा वक़्त से हैं लेकिन सुरक्षा का मसलों पर दोनों देशों में पर्याप्त दूरियां हैं। अगर कोरियाई प्रायद्वीप में कोई परमाणु युद्ध होता है तो चीन के लिए भी ख़तरनाक होगा। अगर चीन एशिया का नेतृत्व करना चाहता है को वह उत्तर कोरिया को बेलगाम नहीं छोड़ सकता है।

उत्तर कोरिया में चीनी कंपनियां आर्म्स प्रोग्राम की आपूर्ति करती हैं। ऐसी स्थिति में चीन चाहे तो उत्तर कोरिया पर लगाम कस सकता है। चीन अब तक उत्तर कोरिया के हर क़दम पर यही कहते आया है कि उसे संयम और शांति से काम लेना चाहिए। चीन अगर लगाम कसना चाहे तो उत्तर कोरिया से तेल निर्यात रोक सकता है और विदेशी मुद्रा समझौते को भी रद्द कर सकता है।

चीन में सरकार के अधिकारियों का मानना कि उत्तर कोरिया पर उनके देश को यथास्थिति के पक्ष में रहना चाहिए। इसके कई कारण हैं। अगर किम जोंग उन का शासन ख़त्म हुआ तो लाखों उत्तर कोरियाई नागरिक सीमा पार कर चीन आएंगे।

अगर ऐसा होता है तो चीन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और अव्यवस्था पैदा होगी। एक सोच यह भी है कि किम जोंग उन के शासन ख़त्म होने के बाद कोरिया का एकीकरण हो सकता है और यह चीन के हित में नहीं होगा क्योंकि एकीकृत कोरिया अमरीका के साथ जाएगा। चीन और नॉर्थ कोरिया पड़ोसी देश हैं और दोनों के रिश्ते हमेशा गोपनीय तरीके से चलते रहे हैं। किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल II भी खुफिया तरीके से चीन जाते थे। उत्तर कोरिया के एटमी प्रोग्राम के चलते अमेरिका से उसके रिश्तों में तनाव चल रहा है। नॉर्थ कोरिया अब तक 6 न्यूक्लियर टेस्ट कर चुका है। हाल ही में उन ने ट्रंप को बातचीत का न्योता भेजा था, जिसे ट्रम्प ने स्वीकार भी कर लिया था। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं की मई में मुलाकात हो सकती है।


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कुलदीप सिंह

Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

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