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तमिलनाडु के तटों पर टैंकरों से हुए तेल रिसाव से हड़कंप, ख़तरे में समुद्री पर्यावरण

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 2 , 2017 , 16:43 IST

चेन्नई के पास समंदर में मालवाहक जहाजों से तेल का रिसाव बदस्तूर जारी है। हालांकि कोस्ट गार्ड और एनडीआरएफ की टीम लगातार राहत और बचाव में जुटी हैं। लेकिन तेल काफी दूर तक फैल चुका है, इसलिए राहत कार्य में दिक्कत हो रही है। 28 जनवरी को चेन्नई से सटे एन्नोर बंदरगाह पर दो पेट्रोलियम पोतों की आपस में टक्कर हो गई थी।

जहाजों के टकराने के बाद उसमें लदा तेल का रिसाव होने लगा। इस रिसाव से एन्नोर स्थित कई तटों और चेन्नई के मरीना समुद्र तट तक तेल आ पहुंचा।

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मछुआरों का कहना है कि दोनों जहाजों के टकराने से पानी में विषैले तेल का रिसाव शुरु हो गया। जिसके कारण बड़ी संख्या में मछलियां और कछुए समुद्र में मर रहे हैं। हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के बाद पानी में किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैला है।

अगर तेल रिसाव पर जल्द से जल्द काबू नहीं पाया गया तो यह घटना राजनीतिक शक्ल भी अख्तियार कर सकती है। तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार पर मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।

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 तेल का रिसाव और राहत-बचाव कार्य:

-28 जनवरी सुबह करीब 4 बजे चेन्नई से सटे एन्नोर पोर्ट पर हुआ हादसा।

- एलपीजी से लदे दो मालवाहक जहाजों की टक्कर।

-टक्कर के बाद जहाज से तेज़ी से समंदर में तेल का रिसाव हुआ ।

-29 जनवरी की सुबह होते-होते मरीना और बसंत नगर बीच तक तेल पहुंचा ।

-समंदर में करीब 2 किलोमीटर तक तेल फैला ।

-INCOIS की रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र में 20 टन तेल बहने का अनुमान ।

 पर्यावरण पर असर:

समंदर में बड़ी मात्रा में तेल का फ़ैलना जहां समुद्री जीवों के लिए घातक साबित हो सकता है। वहीं पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा ।  

-मछली और कछुओं समेत तमाम समुद्री जीवों की जान जा सकती है ।

-तेल की वजह से पानी के भीतर ऑक्सीजन और धूप नहीं जा पाती है।

-समंदर के अंदर पाये जाने वाले जलीय पौधों के अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।

-मछलियों के खाने से लोगों पर बुरा असर पड़ सकता है।

-बिखरे कच्चे तेल की वजह से मछुआरों की नांव और जाल खराब होने का डर ।

-मछलियों के मरने से मछुआरों को रोजगार खत्म होने का डर भी सताने लगा है।

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 अगर इकोलॉजी की भाषा में बात करें तो, तेल का रिसाव होने से पूरे ईको सिस्टम पर इसका असर होगा। जीविका और खाद्य श्रृंखला पर भी असर पड़ेगा।

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