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कलकत्ता हाईकोर्ट के जज कर्णन का आरोप, दलित विरोधी हैं सुप्रीम कोर्ट के जज

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 12 , 2017 , 18:39 IST

कलकत्ता उच्च न्यायालय के जज सीएस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट को दलित विरोधी बताया है। यह बात उन्होंने अवमानना के नोटिस के विरोध में कही है। बता दें कि कर्णन को सात सदस्यीय संविधान पीठ ने अवमानना नोटिस भेजा है।

सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि ऊंची जाति के जज अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के जज से मुक्ति चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि एक दलित जज को अवमानना नोटिस जारी करना अवैधानिक है और यह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के खिलाफ है।

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जस्टिस कर्णन ने कहा कि 'संविधान पीठ हाईकोर्ट के कार्यरत जज के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना नोटिस जारी नहीं कर सकती। मेरा पक्ष सुने बगैर मेरे खिलाफ ऐसा आदेश कैसे जारी किया जा सकता है। इससे जाहिर होता है कि पीठ मुझसे द्वेष रखती है।

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उन्होंने कहा है कि अवमानना नोटिस जारी करने से मेरी समानता और प्रतिष्ठा का अधिकार प्रभावित हुआ है और साथ ही यह प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस के भी खिलाफ है।

क्या है पूरा मामला

जज कर्णन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कुछ जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उन्होंने बाकायदा ऐसे 20 जजों के नामों की सूची भी दी थी। इस मामले में आठ अक्तूबर 2016 को जस्टिस जेएस खेहर सहित सुप्रीम कोर्ट के सात वरिष्ठ जजों की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जस्टिस करनन को अवमानना नोटिस जारी करते हुए 13 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा था।


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