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भारत बंद: प्रदर्शन में शर्मसार हुई इंसानियत, बिजनौर में बेटे की गोद में पिता ने तोड़ा दम

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 3 , 2018 , 10:21 IST

दलित संगठनों की ओर से बुलाए गए भारत बंद ने बड़ी हिंसा का रुप ले लिया देश के लगभग हर हिस्सों से हिंसा की खबरें आती रहीं। देश में भारत बंद का असर 12 राज्यों में देखा गया। इनमें से उन राज्यों में सबसे ज्यादा हिंसा और प्रदर्शन देखने को मिला।

इनके अलावा पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश में हिंसक झड़प हुईं। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 7, यूपी और बिहार में तीन-तीन, वहीं राजस्थान में एक की मौत हो गई। उधर, पंजाब में बंद के चलते सीबीएसई की परीक्षाएं टाल दी गई हैं।

इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। इसकी खास वजह है। दरअसल, जिन राज्यों में उग्र प्रदर्शन हुए वहां की 71 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर एससी/एसटी वोटर असर डालते हैं।

ऐसी अराजकता, ऐसी गुंडागर्दी हुई जो शायद ही पहले कभी हुई हो। कुछ ऐसी तस्वीरें भी देखने को मिली जिसने इंसानियत को शर्मशार कर दिया। भारत बंद के दौरान अलग-अलग जगहों पर कई लोगों की मौत की खबरें आईं।

सोमवार को भारत बंद के दौरान उत्तर प्रदेश के बिजनौर में 68 वर्षीय बुजुर्ग की मौत समय पर अस्पताल न पहुंचने की वजह से हो गई। उसके बेटे ने बुजुर्ग पिता को बचाने की पूरी कोशिश की, मगर उसका समर्पण भी काम न आया।

32 वर्षीय रघुवर सिंह को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने बीमार पिता लोक्का सिंह को प्राइवेट अस्पताल या मेरठ के किसी बड़े अस्पताल ले जाने को कहा था, लेकिन समय और पैसों की कमी के चलते रघुवर ने पहला विकल्प चुना।

रघुवर ने बताया, 'वह क्रोनिक अस्थमा से पीड़ित थे। रविवार रात जब उनकी स्थिति खराब हो गई तो उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डॉक्टरों ने उनकी जांच कर इलाज करना शुरू किया, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था।'

वह शास्त्री चौक की ओर रवाना हुए जो जिला अस्पताल से एक किमी दूर है, लेकिन जुडगी क्रॉसिंग में उनकी ऐम्बुलेंस फंस गई। वहां सौ से ज्यादा प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे। चारों ओर शोर शराबा था।

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रघुवर ने कहा, 'मैंने उनसे विनती की कि मुझे जाने दें। मैंने एक हद तक जोर लगाकर उनसे पुकार लगाई, लेकिन किसी ने मेरी चीख नहीं सुनी। कोई वहां से नहीं हिला। मैं ऐंबुलेंस के अंदर अपने पिता को मरते हुए देख सकता था। मुझे नहीं पता था कि क्या करना है। मैं किसी भी हालत में उन्हें बचाना चाहता था, इसलिए मैंने उन्हें कंधे में उठाया और दौड़ना शुरू किया।'

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