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पत्थरबाज़ों पर पैलेट गन की जगह चलेंगी प्लास्टिक बुलेट्स, CRPF करेगी इस्तेमाल

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 7 , 2017 , 19:48 IST

घाटी में पत्थरबाज़ों से निपटने के लिए नई रणनीति तैयार की गई है। अब पत्थरबाज़ों पर पैलेट गन की जगह जल्द ही प्लास्टिक बुलेट्स का इस्तेमाल किया जाएगा। प्लास्टिक की गोलियां शरीर पर नुकसान कम करती हैं और इनके इस्तेमाल से पैलेट गन पर सुरक्षाबलों की निर्भरता भी कम होगी। 

नई प्लास्टिक बुलेट्स को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने विकसित किया है और पुणे ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने इसकी मैन्युफैक्चरिंग की है। कश्मीर में पत्थरबाज़ी के दौरान पैलेट गन्स के इस्तेमाल पर विवाद है। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी भी दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि पैलेट गन के इस्तेमाल से बहुत ज्यादा चोट लगती है।

 

CRPF करेगी प्लास्टिक बुलेट्स का इस्तेमाल

पत्थरबाजी के दौरान AK-47 से दागी जा सकेंगी प्लास्टिक बुलेट्स। CRPF के DG आरआर भटनागर ने कहा,

कश्मीर में लॉ एंड ऑर्डर और प्रोटेस्ट को संभालने का काम कर रही CRPF के जवान एके-47 और एके-56 का इस्तेमाल करते हैं। इन नई प्लास्टिक बुलेट्स को एके सीरीज की राइफल्ससे भी दागा जा सकता है।

 

पथराव होने पर बस बुलेट्स बदलने की जरूरत

टेस्ट में सामने आया है कि ये प्लास्टिक बुलेट्स कम घातक हैं। इससे भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पैलेट गन्स और दूसरे दूसरे नॉन-लीथल वेपंस इस्तेमाल पर हमारी निर्भरता कम होगी। ये सबसे नया कम घातक हथियार होगा, जिसका इस्तेमाल फोर्स भीड़ पर कंट्रोल करने और पत्थरबाजों को जवाब देने के लिए करेगी। हमने अभी अपनी सभी यूनिट्स को 21 हजार राउंड भेजे हैं। जैसे ही पथराव शुरू होता है, जवानों को केवल बुलेट्स बदलने की जरूरत है। इसके अलावा फोर्स को और ज्यादा पंप एक्शन गन्स मिल रही हैं, जिनमें मेटल डिफ्लेक्टर लगे हों ताकि पैलेट्स इंजरी कमर से ऊपर ना हों।

दूसरी जगहों पर भी हो सकता है इस्तेमाल


हमारी स्पेशलाइज्ड एंटी रॉयट यूनिट RAF भी नई प्लास्टिक बुलेट्स का इस्तेमाल कर सकती है। हम ये देखेंगे कि भविष्य में इनका कैसे इस्तेमाल किया जाना है।
बता दें कि पैलेट गन्स पर विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने पैलेट शॉट गन्स की जगह मिर्च वाले पावा शेल्स को लाने के निर्देश दिए थे।

सरकार ने कहा था- पैलेट गन आखिरी रास्ता

सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की पैलेट गन बंद कराने की मांग वाली पिटीशन पर 10 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। 

इसमें अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था,

इसके इस्तेमाल का मकसद किसी की जान लेना नहीं है, पैलेट गन प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने का आखिरी रास्ता है। भीड़ को काबू करने के लिए पैलेट गन की जगह रबर बुलेट के इस्तेमाल जैसे अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। रबर बुलेट पैलेट गन की तरह घातक नहीं है।

SC ने कहा था- सरकार नया विकल्प खोजे

चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने इस पिटीशन पर सुनवाई के दौरान 27 मार्च को केंद्र सरकार को पैलेट गन का विकल्प ढूंढने का निर्देश दिया था। 

बेंच ने कहा था,

जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के बजाय गंदा बदबूदार पानी, केमिकलयुक्त पानी या ऐसा कोई अन्य विकल्प आजमा सकते हैं। इससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचेगा।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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