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पत्नी के गहने गिरवी रख दादा साहब फाल्के ने बनाई थी पहली फिल्म (जन्मदिन विशेष)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1965
| अप्रैल 30 , 2018 , 14:29 IST

आज दादा साहब फाल्के की 148वें जयंती के मौके पर गूगल ने डूडल बना कर उन्हें याद किया है। दादा साहब फाल्के को भारतीय सिनेमा के जन्मदाता के रूप में जाना जाता है। भारत में सिनेमा की नींव रखने वाले वही थे। दादा साहब का जन्म 30 अप्रैल 1870 को त्रयंबक महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता एक सफल विद्वान थे।

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दादा साहेब फाल्के ने अपनी पढ़ाई जेजे स्कूल ऑफ आर्ट मुंबई से की। इसके बाद उन्होंने गुजरात के बड़ौदा में महाराजा सयाजीराओ युनिवर्सिटी में कला भवन से स्क्लप्चर, इंजीनियरिंग, ड्रोइंग, पेंटिंग और फोटोग्राफी सीखी और गोधरा में एक फोटोग्राफर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। वह एक जानमाने प्रोड्यूसर, स्क्रीनराइटर और डायरेक्टर थे।

उन्होंने अपने 19 साल के करियर में 95 फिल्में और 27 शॉर्ट फिल्में बनाई थी। दादा साहेब की पहली फिल्म 'राजा हरीशचंद्र' थी। उन्होंने 'मोहिनी बहासमसूर', 'सत्यवन सावित्रि' और 'कलिया मरदान' जैसी यादगार फिल्में बनाई हैं।

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1969 में भारत सरकार ने दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की स्थापना करके पौराणिक फिल्म निर्माता को सम्मानित किया।  जो भारतीय सिनेमा में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक माना जाता है। यह अवॉर्ड हर साल राष्ट्रीय अवॉर्ड के साथ दिया जाता है। एक्ट्रेस देविका रानी पहली एक्ट्रेस थीं जिन्हें इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

दादा साहब के बारे में कुछ रोचक बातें-:

1. दादासाहब फाल्के का नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के है। उनका जन्म महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर में एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता संस्कृत के विद्वान थे।

2. 1885 में उन्होंने सर जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट्स में पढ़ाई की जहां से वे कला भवन ऑफ बड़ौदा चले गए। वहां उन्होंने चित्रकला, पेंटिंग और फटॉग्रफी सीखी।

3. उन्होंने फटॉग्रफर के तौर पर अपना करियर शुरू किया और बाद में एक प्रिंटिंग प्रेस शुरू की। वह नई टेक्नॉलजी सीखने के लिए जर्मनी भी गए थे।

4. उनका फिल्मी दुनिया में आने का सफर बड़ा रोचक है। उन्होंने एक साइलेंट मूवी 'द लाइफ ऑफ क्राइस्ट' देखी। फिल्म देखने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी से पैसा उधार लिया और फिल्म 'राजा हरिशचंद्र' बनाई। किसी भारतीय द्वारा बनाई गई इस पहली फिल्म को सार्वजनिक रूप से कोरोनेशन सिनेमा, मुंबई में 3 मई, 1913 को दिखाया गया।

5. राजा हरिशचंद्र की सफलता के बाद उन्होंने कई फिल्में बनाईं। अपने 19 सालों के फिल्म करियर में उन्होंने 95 फिल्म और 26 शॉर्ट फिल्में बनाईं। सत्यवान सावित्री, मोहिनी भस्मासुर, लंका दहन आदि उनकी कुछ प्रमुख फिल्में थीं। उनकी आखिरी साइलेंट मूवी सेतुबंधन थी और उनकी आखिरी मूवी गंगावतरण थी। बोलती फिल्म जब बनना शुरू हुई तो फिल्म मेकिंग का उनका स्टाइल अप्रचलित हो गया।

दादासाहेब फाल्के का फिल्मी करियर 19 साल का रहा। अपने 19 साल के करियर में उन्होंने कई यादगार फिल्में दीं। 6 फरवरी 1944 को 73 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।


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