दीपावली स्पेशल 2018

शुभ मुहूर्त, शुभ लग्न में करें दिवाली पूजन, नौकरी-व्यापार में होगी बरकत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1567
| नवंबर 7 , 2018 , 11:46 IST

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।

हरि प्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दया निधे ।।

दीपावली रोशनी का त्योहार। दीपावली खुशियों का त्योहार। दीपावली धन-वर्षा का त्योहार। धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली मनाई जाती है। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए यह त्योहार खास होता है। यही नहीं धन के साथ साथ बुद्धि और समझ इसकी भी प्राप्ति होती है। इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान गजानन और मां सरस्वती का पूजन जरूर करना चाहिए। जहां मां लक्ष्मी धन वैभव की देवी हैं वहीं गजानन महाराज बुद्धि जबकि मां सरस्वती समझ की देवी हैं।

पूजन मुहूर्त

दीपावली का पूजन स्थिर लग्न में करना चाहिए। शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक समय पूजन के लिए उत्तम है। इस समय व्यापारिक प्रतिष्ठान के साथ साथ घर में पूजन करें। जबकि शाम 7.15 से रात 9.30 बजे तक भी पूजा की जा सकती है।

निशाकाल में करें विशेष पूजन

विशेष साधना, सिद्धि के लिए मध्य रात्रि यानी सिंह लग्न में पूजा करना चाहिए। इसे निशा काल भी कहते हैं। इस बार रात 12.18 से रात 2.35 तक सिंह लग्न है। तंत्र साधकों को इस दिन का विशेष इंतजार रहता है। इस समय किया गया पूजन, जप, पाठ का कई गुना फल मिलता है।

पूजन में रखें ध्यान

मां लक्ष्मी के पूजन से पहले भगवान विष्णु का ध्यान जरूर करें। क्यों कि भगवान विष्णु के पूजन के बिना लक्ष्मी जी प्रसन्न नहीं होती हैं। सबसे पहले इस दिन पूर्व दिशा में अखंड दीपक जलाएं। फिर गणेश जी का पंचोपचार पूजन करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और फिर लक्ष्मी पूजन। लक्ष्मी जी को पूजन में कमल का फूल, केवड़े का इत्र, सफेद भोग जरूर चढ़ाएं। साथ ही मां लक्ष्मी के 108 से कमल का फूल चढ़ाएं। अगर ये संभव न हो सके तो 108 कमल बीज यानी कमलगट्टा चढ़ाएं। पूजन के समय श्री सुक्त पाठ करें। साथ ही इस दिन अपने घर, दुकान में स्थित कैश बॉक्स का पूजन करना न भूलें। यही नहीं खील बताशे और चीनी के बने खिलौने का भोग विशेष रुप से लगाएं। पूजा के बाद गणेश लक्ष्मी सरस्वती और भगवान विष्णु की आरती करें। फिर हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।

या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी: 
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा 
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्॥

आचार्य कमल नयन तिवारी


कमेंट करें