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बायोफ्यूल विमान का सफल परीक्षण, ऐसा करने वाला पहला विकासशील देश बना भारत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 28 , 2018 , 13:16 IST

सस्ती विमानन सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी, स्पाइसजेट ने सोमवार को आंशिक रूप से जैव-ईंधन संचालित देश की पहली परीक्षण उड़ान का सफलतापूर्वक परिचालन किया। मिश्रित जैव-ईंधन के साथ विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के मिश्रण से लैस स्पाइसजेट के Q400 उड़ान संख्या वाले विमान ने सोमवार को उड़ान भरी।

इस विमान ने देहरादून से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल 2 पर इस विमान की अगवानी प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों और विमानन कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने की। नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, "सरकार 2035 तक एक पर्यावरण अनुकूल विमानन कार्ययोजना बनाएगी।"

यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एटीएफ की अधिक कीमत होने के कारण भारतीय विमानन क्षेत्र की सभी दिग्गज कंपनियां 2018-19 की पहली तिमाही में घाटा होने की बात कह रही हैं। फिलहाल, ईंधन कीमत घरेलू विमानन की कुल परिचालन लागत का 50-55 प्रतिशत है। दुनिया के जिन देशों में एटीएफ की कीमत सर्वाधिक है, उसमें भारत भी शामिल है, क्योंकि यहां राज्य लेवी और कर जुड़ जाते हैं। जहाजरानी उद्योग में इस्तेमाल होने वाले बंकर ईंधन की तरह ईंधन जीएसटी के दायरे में नहीं आता।

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विमान के यहां पहुंचने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, "एटीएफ के साथ जैव-ईंधन का मिश्रण करने की नीति, उपयोग और मानकीकरण पर कैबिनेट ने संज्ञान लिया है और इसे जल्द ही तैयार किया जाएगा।"

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परीक्षण की सफलता से उत्साहित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आइआइपी) के निदेशक अंजन रे ने कहा कि इस प्रयोग से न केवल तेल के आयात पर अंकुश लगेगा, बल्कि जैव ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी सफलता मिलेगी। उन्होंने बताया कि यह जैव ईंधन आइआइपी की प्रयोगशाला में तैयार किया गया है।

इसके लिए बायो फ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिये छत्तीसगढ़ से जैट्रोफा का बीज खरीदा। इस बीज से ही जैव ईंधन तैयार किया जा रहा है। बताया कि जल्द ही संस्थान जैव ईंधन के लिए प्लांट लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। निदेशक ने बताया कि प्लांट की शुरुआती क्षमता दो सौ लीटर प्रतिदिन होगी।

फायदा-: 

बायोफ्यूल सब्जी के तेलों, रिसाइकल ग्रीस, काई, जानवरों के फैट आदि से बनता है। जीवाश्म ईंधन की जगह इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, एयरलाइंस इंटरनैशनल एयर ट्रांसपोर्ट असोसिएशन (IATA) नाम की ग्लोबल असोसिएशन ने लक्ष्य रखा है कि उनकी इंडस्ट्री से पैदा होने वाले कॉर्बन को 2050 तक 50 प्रतिशत कम किया जाए। एक अनुमान के मुताबिक, बायोफ्यूल के इस्तेमाल से एविएशन क्षेत्र में उत्सर्जित होनेवाले कार्बन को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। 


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