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धनतेरस के दिन करें ये काम, होगी लक्ष्मी की बौछार

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 17 , 2017 , 08:03 IST

मंगलवार,17 अक्टूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा और इसी के साथ 5 दिवसीय दीपावली का त्योहार शुरू हो जाएगा। इस दिन कोई न कोई नया सामान खरीदने की परम्परा है। धनतेरस के दिन सोने-चांदी आदि धातु की चीज खरीदना शुभ माना जाता है और अगर ये चीज शुभ योग में खरीदा जाए तो ये और अधिक फलदायक होता है। हालांकि इस मौके पर सिर्फ सोने और चांदी की ही नहीं बल्कि कई अन्य सामान भी लोग खरीदते हैं, कई लोग इस दिन झाडू खरीदना शुभ मानते हैं।

धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और सेहत की रक्षा और आरोग्य के लिए धन्वन्तरी देव की उपासना की जाती है। इस दिन यमराज की भी पूजा होती है। पूरे साल में यह अकेला ऐसा दिन है, जिस दिन यमराज की पूजा की जाती है और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन विशेष विधि से धनतेरस की पूजा करने वाले लोगों को जीवनभर धन की कमी नहीं होती और मान व सम्मान बना रहता है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन नया सामान खरीदने से धन 13 गुना बढ़ जाता है। धनवंतरी देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है। धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है।

पूजन की सामग्री-

21 पूरे कमल बीज, मणि पत्थर के 5 प्रकार, 5 सुपारी, लक्ष्मी–गणेश के सिक्के (10 ग्राम या अधिक), अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी पत्र, पान, चंदन, लौंग, नारियल, सिक्के, काजल, दहीशरीफा, धूप, फूल, चावल, रोली, गंगा जल, माला, हल्दी, शहद, कपूर आदि।

पूजन विधि-

संध्याकाल में उत्तर की ओर कुबेर तथा धन्वन्तरी की स्थापना करें. दोनों के सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जलाएं। कुबेर को सफेद मिठाई और धन्वन्तरि को पीली मिठाई चढ़ाएं। पहले "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें। फिर "धन्वन्तरि स्तोत्र" का पाठ करें। धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करना अनिवार्य है। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिट्टी के दीप जलाएं। दीप जलाकर उनकी पूजा करें। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं। प्रसाद ग्रहण करें पूजा के बाद, दीपावली पर, कुबेर को धन स्थान पर और धन्वन्तरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें।

यम का दीप भी जलाएं-

- घर में पहले से दीपक जलाकर यम का दीपक ना निकालें। दीपक जलाने से पहले उसकी पूजा करें।

- किसी लकड़ी के बेंच पर या जमीन पर तख्त रखकर रोली के माध्यम से स्वस्तिक का निशान बनायें।

- फिर एक मिट्टी के चौमुखी दीपक या आटे से बने चौमुखी दीप को उस पर रखें।

- दीप के आसपास तीन बार गंगा जल का छिड़काव करें।

- दीप पर रोली का तिलक लगाएं। उसके बाद तिलक पर चावल रखें।

- दीप पर थोड़े फूल चढ़ाएं।

- दीप में थोड़ी चीनी डालें।

- इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दीप में डालें।

- परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं।

- दीप को प्रणाम करें।

- दीप को घर के गेट के पास रखें। उसे दाहिने तरफ रखें और यह सुनिश्चित करें की दीप की लौ दक्षिण दिशा की तरफ हो।

- चूंकि यह दीपक मृत्यु के नियन्त्रक देव यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन तो करें ही, साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो।

धनतेरह की कथा -

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इसके अलावा और भी कारण हैं जिसकी वजह से धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। धनवंतरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धनवंतरी चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। इस दिन लोग गणेश और लक्ष्मी को घर लाया जाता है। इस दिन लोग किसी को उधार नहीं देते हैं और ना ही लेते हैं। इस दिन धन की वृद्धि के लिए लोग नई वस्तुएं लेते हैं।

धनतरेस के दिन करें ये काम -

धनतेरस के दिन भगवान कुबेर की पूजा का बहुत महत्व है। इस दिन कुबेर की तस्वीर खरीदकर लाएं और उसे घर में उत्तर दिशा में स्थापित करें। ऐसा करने से कारोबार पर कभी भी कमी नहीं आएगी।

धनतेरस पर शंख खरीदना भी अत्यंत शुभ है। शंख को घर में लाकर भगवान के पास रखें और रोज इसे बजाएं। शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में रोज पूजा में शंख बजाया जाता है, इस घर पर कभी भी मुसीबत नहीं आती।

माना जाता है कि मां लक्ष्मी को कौड़ियां बहुत पसंद है। धनतेरस पर कौड़ियां लाकर उन्हें पूजा स्थल पर रखें और अन्य देवताओं के साथ इनकी भी पूजा करें। दिवाली के दिन इनकी पूजा करने के बाद इसे एक लाल कपड़े में बांधकर अपने धन स्थल या तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती।

इस दिन साबुत धनिया जरूर खरीदें और इन्हें अपने गार्डन में या किसी गमले में बो दें। इनकी देखभाल रोज करें। माना जाता है कि जिस घर में धनिया जितना उगेगा उतनी ही घर पर कृपा बरसेगी। धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी शुभ है। इस दिन झाड़ू खरीदकर लाने से दरिद्रता और नकारत्मक ऊर्जा दूर चली जाती है।

ऐसी 4 चीजें हैं, जिस धनतेरस पर नहीं खरीदना चाहिए। 

1. इस दिन कांच का सामना खरीदने से बचना चाहिए। क्रॉकरी आदि कुछ भी इस दिन न खरीदें। कांच से बनीं चीजें राहु से संबंधित होती है। अगर फिर भी आपके लिए कांच का सामान जरूरी है तो ध्यान रखें कि सामान बिल्कुल  पारदर्शी हो।

2. एल्युम‌िन‌ियम के बर्तन भी न खरीदें। राहु से संबंध‌ित वस्तु होने के कारण इनकी भी खरीदारी करने से बचें।

3.चाकू, कैंची, छुरी और लोहे के बरतन इस दिन तो बिल्कुल भी न खरीदें।

4.सोने के आभूषणों की बजाय इस दिन हीरे और चांदी के अाभूषण खरीदना अध‌िक शुभ रहेगा।

आइए जानते हैं धनतेरह पर क्‍या है पूजा का मुहूर्त

धनतेरस पर पूजा का समय - 19:32 अपराह्न से 20:18 बजे तक
प्रदोष काल –17:49 बजे से 20:18 अपराह्न
वृषभ काल - 19:32 अपराह्न से 21:33 बजे तक
17 अक्‍टूबर, 2017 को त्रयोदशी तिथि सुबह 12 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी
18 अक्‍टूबर, 2017 को त्रयोदशी तिथि सुबह 8 बजे समाप्‍त होगी
सूर्योदय के बाद शुरू होने वाले प्रदोषकाल के दौरान लक्ष्मी पूजा की जानी चाहिए


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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