ओपिनियन

राफेल विमान कहीं बोफर्स तोप न बन जाएं

icon डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 0
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| सितंबर 1 , 2018 , 18:21 IST

डर यह है कि फ्रांस के राफेल विमानों का सौदा कहीं बोफर्स की तोपों की तरह गड़गड़ाने नहीं लगे ? जिन विमानों के लिए कांग्रेस सरकार सिर्फ 500 करोड़ रु. में सौदा कर रही थी, उसी विमान के लिए 1600 करोड़ रु. देने की हां भरकर कहीं नरेंद्र मोदी ने अपने आप को राजीव गांधीवाले जाल में तो नहीं फंसा लिया है ? मोदी का सौभाग्य है कि वर्तमान सरकार में विश्वनाथ प्रताप सिंह-जैसा कोई नैतिक दुस्साहस करनेवाला मंत्री नहीं है और क्वात्रोची--जैसा कोई दलाल भी बीच में नहीं है। इसके बावजूद हर सोचने-विचारनेवाले नागरिक के मन में सवाल उठ रहा है कि ऐसा कौनसा कारण है, जिसके चलते 500 करोड़ का जहाज हम 1600 करोड़ में खरीद रहे हैं ?

राजीव गांधी को तो 60 करोड़ का घोटाला ले बैठा था, अब तो यह 60 हजार करोड़ का घोटाला है। नहीं, महाघोटाला है। राजीव के पास 410 सीटें थीं, मोदी के पास सिर्फ 282 थीं। अब 273 रह गईं। 2019 में कहीं ये आधी से भी कम न रह जाएं। वैसे मोदी को डरने की ज्यादा जरुरत नहीं है, क्योंकि रेफेल सौदे को सिर्फ कांग्रेस तूल दे रही है, जिसके माथे पर बोफर्स का काला टीका जड़ा हुआ है। यह ठीक है कि रेफेल युद्धक विमान है। उसके सारे रहस्य नहीं खोले जा सकते लेकिन सरकार को मोटी-मोटी यह बात तो देश को बतानी ही चाहिए कि उसकी कीमत तीन गुनी क्यों दी जा रही है ? कहीं किसी दलाल को मोटा कमीशन तो नहीं दिया जा रहा है, जो घूम फिरकर सत्तारुढ़ नेता के हाथ आ जाएगा ?

इस सौदे के सिलसिले में अनिल अंबानी का नाम उछलना क्वात्रोची से भी ज्यादा खतरनाक है। अंबानी की एक फर्म ने तत्कालीन फ्रेंच राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलान की प्रेमिका जूली गाए के साथ मिलकर एक फिल्म बनाने में करोड़ों रु. लुटाए थे, ताकि रेेफेल के सौदे में उसे कुछ हिस्सेदारी मिल सके। यह हिस्सेदारी रेफेल की निर्माता कंपनी दस्साल्ट एविएशन ने अंबानी को दी थी। इस तथ्य की चर्चा सार्वजनिक होने से आजकल अंबानी काफी घबराए हुए हैं लेकिन रोजाना बोफर्स की तरह रेफल के नए-नए छिलके उपड़ते जा रहे हैं। अंबानी और मोदी के व्यक्तिगत संबंधों के भी कई नए आयाम सामने आ रहे हैं। ऐसे में वित्तमंत्री अरुण जेटली की सफाई निरर्थक है। मोदी या रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन को देश के सामने दूध का दूध और पानी का पानी कर देना चाहिए।