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उड्डयन मंत्रालय का बड़ा फैसला, 1 दिसंबर से भारत में कहीं भी उड़ा सकेंगे ड्रोन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 28 , 2018 , 13:16 IST

दूनिया भर में ड्रोन उड़ाने को लेकर कई तरह के कानून और सावधानियां होतीं हैं। ठीक उसी तरह भारत में भी ड्रोन उड़ाने पर तरह-तरह के नियमों को देखना पड़ रहा था। अब केंन्द्र सरकार ने फैसले के मुताबिक 1 दिसम्बर से ही देश में ड्रोन उड़ाने को कानूनी मंजूरी मिल सकती है। नागर विमानन मंत्रालय ने इसके लिए एक नियमावली तैयार कर ली है जो एक दिसंबर से लागू होगी। इसमें ड्रोन उपयोगकर्ताओं को अपने ड्रोन, पायलट और मालिकों का एक बार रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा।

प्रत्येक फ्लाइट उपयोगकर्ता को मोबाइल ऐप के जरिए अनुमति लेनी होगी और तुंरत ही स्वचालित तरीके से इसका उत्तर यानि परमिट मिलने और नहीं मिलने की जानकारी मिल जाएगी। डिजिटल अनुमति के बिना उड़ान भरने वाला कोई भी ड्रोन टेकऑफ नहीं कर सकेगा।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) के इस्तेमाल को लेकर जो नियमावली तैयार की गई है, उसमें एयरस्पेस को तीन भागों में विभाजित किया गया है- पहला रेड जोन (उड़ान की अनुमति नहीं)-जैसे की एयरपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय बार्डर, दिल्ली का विजय चौक, राज्यों के सचिवालय और सुरक्षा से जुड़े अन्य स्थल। यलो जोन (नियंत्रित वायु क्षेत्र), और ग्रीन जोन (स्वचालित अनुमति)। वहीं ड्रोन का इस्तेमाल दिन के समय 400 फीट ऊंचाई तक सीमित रहेगा।

वहीं वजन के हिसाल से ड्रोन की पांच श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें नैनो ड्रोन- 250 ग्राम, माइक्रो ड्रोन- 250 ग्राम से दो किलो, मिनी ड्रोन- दो किलो से 25 किलो, स्मॉल ड्रोन- 25 किलो से 150 किलो और लार्ज ड्रोन- 150 किलो शामिल है। इसके उपयोगकर्ताओं को पहले अपने मालिक, पायलट और ड्रोन का पंजीकरण करवाना होगा। जिसके बाद मोबाइल एप के जरिए अनुमति लेनी होगी, अनुमति मिलने या न मिलने की जानकारी स्वचालित तरीके से तुरंत मिलेगी।

पॉलिसी में जो बयान है वह इस प्रकार है, 'मानवरहित एयरक्राफ्ट ऑपरेटर परमिट (UAOP) रिमोटली एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) ऑपरेटर्स के लिए जरूरी होगा। RPAS जो 50 फीट, 200 फीट के नीचे या सुरक्षा, सेंट्रल एजेंसी के द्वारा इस्तेमाल हो रहे हैं उनके लिए ये नहीं चाहिए होगा।'

नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने सरकार के इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि भारत के उड्डयन के इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। प्रभु ने उम्मीद जताई कि इससे कई तरह के नए और आकर्षक प्रयोगों को मौका मिलेगा और भारतीय ड्रोन इंडस्ट्री को भी प्रोत्साहन मिलेगा।


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