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नोटबंदी बेहद सख्त फैसला, इससे आर्थिक विकास दर हुई धीमी: अरविंद सुब्रमण्यन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 29 , 2018 , 18:00 IST

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने दो साल पहले हुई नोटबंदी को मोदी सरकार का काफी सख्त और अर्थव्यवस्था को झटका देने वाला फैसला बताया है। इससे GDP ग्रोथ रेट 7 महीने के सबसे निचले स्तर 6.8% पर पहुंच गई थी, जबकी नोटबंदी से पहले यह 8% थी।

सुब्रमण्यन ने चार वर्ष के कार्यकाल के बाद इस वर्ष की शुरुआत में पद छोड़ दिया था। उन्होंने अपनी पुस्तक में इस बात का जिक्र नहीं किया कि क्या नोटबंदी पर फैसला लेते वक्त सरकार ने उनकी राय मांगी थी की नहीं। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण फैसले पर सीईए की राय नहीं ली थी।

पेंगुइन से प्रकाशित होने वाली अपनी पुस्तक 'ऑफ काउंसल: द चैलेंजेज ऑफ द मोदी-जेटली इकॉनमी' में उन्होंने लिखा है कि, एक ही झटके में 86% मुद्रा को चलन से बाहर कर दिया। नोटबंदी से वास्तविक GDP ग्रोथ प्रभावित हुई। GDP ग्रोथ पहले भी घट रही थी, लेकिन नोटबंदी के बाद इसकी गिरावट की रफ्तार तेज हो गई।'

सुब्रमण्यन ने 'नोटबंदी की दो पहले- राजनीतिक एवं आर्थिक' नामक अध्याय में लिखा है, नोटबंदी से पहले की छह तिमाहियों में औसत ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत था और बाद की सात तिमाहियों में यह 6.8 प्रतिशत हो गया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई इस बात से असहमत होगा कि नोटबंदी से आर्थिक विकास में सुस्ती आई। बल्कि, चर्चा इस बात की होती रही है कि नोटबंदी ने कितना प्रभाव छोड़ा। क्या इससे जीडीपी ग्रोथ रेट 2 प्रतिशत घट या और भी ज्यादा? उन्होंने लिखा, हालांकि इस अवधि में कई अन्य कारकों ने ग्रोथ को प्रभावित किया, खासकर ऊंची वास्तविक ब्याज दर, जीएसटी का क्रियान्वयन और तेल की कीमतें।

इसके आगे उन्होंने लिखा है कि, लेकिन जब प्रमुख रूप से अनौपचारिक क्षेत्र को प्रभावित करने वाला नोटबंदी जौसा झटका लगता है तब आर्थिक गतिविधियों को मापने के लिए औपचारिक सूचकांकों पर निर्भरता से जीडीपी के बढ़े-चढ़े आंकड़े आएंगे। इस अवधारणा से पहेली नहीं सुलझ पाती है क्योंकि अनौपचारिक क्षेत्र की आमदनी में गिरावट से औपचारिक क्षेत्र की मांग को झटका लगोगा और यह बड़ा असरदायी होगा।

सुब्रमण्यन के मुताबिक नोटबंदी एक अनोखा फैसला था। आधुनिक इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जब सामान्य परिस्थितियों में किसी देश ने नोटबंदी जैसा फैसला लिया हो।


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