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नहीं रहे सुप्रसिद्ध साहित्यकार केदारनाथ सिंह, AIIMS में ली अंतिम सांस

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 20 , 2018 , 15:59 IST

हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह का 83 साल की उम्र में निधन हो गया है। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डॉ. केदारनाथ सिंह को करीब डेढ़ माह पहले कोलकाता में निमोनिया हो गया था। इसके बाद से वह बीमार चल रहे थे। उनका सोमवार रात करीब साढ़े आठ बजे एम्स में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक पुत्र और पांच पुत्रियां हैं।

मंगलवार को दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

केदारनाथ सिंह नए कविता के प्रतिनिधि कवियों में से एक थे। उन्हें हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए 2013 में 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।

डॉ.सिंह के निधन पर शोक जाहिर करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, "सुप्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार केदारनाथ सिंह जी के निधन के समाचार से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है। सरल भाषा में जीवन की जटिलताओं की अभिव्यक्ति करने की उनकी अनूठी शैली थी। उनके निधन से हिंदी जगत का एक सशक्त हस्ताक्षर मिट गया है। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।"

उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार और व्यास सम्मान समेत कई सम्मानों से नवाजा गया था। उनके प्रमुख कविता संग्रहों में ‘अभी बिलकुल अभी, जमीन पक रही है, यहां से देखो, बाघ, अकाल में सारस और उत्तर कबीर’ शामिल हैं। आलोचना संग्रहों में ‘कल्पना और छायावाद, मेरे समय के शब्द’ प्रमुख हैं।

केदारनाथ सिंह का जन्म नवंबर 1934 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया गांव में हुआ था। उन्होंने बनारस विश्वविद्यालय से 1956 में हिन्दी में एमए और 1964 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। उन्होंने जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में बतौर आचार्य और अध्यक्ष पद पर भी सेवा दी थी।

केदारनाथ सिंह चर्चित कविता संकलन ‘तीसरा सप्तक’ के सहयोगी कवियों में से एक थे।

इनकी कविताओं के अनुवाद लगभग सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, स्पेनिश, रूसी, जर्मन और हंगेरियन आदि विदेशी भाषाओं में भी हुए हैं। केदारनाथ सिंह ने कविता पाठ के लिए दुनिया के अनेक देशों की यात्राएं की थी।

कविता संग्रह : अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक रही है, यहां से देखो, बाघ, अकाल में सारस, उत्तर कबीर और अन्य कविताएं, तालस्ताय और साइकिल

आलोचना : कल्पना और छायावाद, आधुनिक हिंदी कविता में बिंबविधान, मेरे समय के शब्द, मेरे साक्षात्कार

संपादन : ताना-बाना (आधुनिक भारतीय कविता से एक चयन), समकालीन रूसी कविताएं, कविता दशक, साखी (अनियतकालिक पत्रिका), शब्द (अनियतकालिक पत्रिका)

सम्मान : मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार, जीवन भारती सम्मान, दिनकर पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान


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