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Movie Review: कमजोर कहानी के साथ बोर करती है 'वेलकम टू न्यूयॉर्क'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 23 , 2018 , 16:00 IST

वासु भगनानी और जैकी भगनानी निर्मित और चाकरी तोलेटी निर्देशित फिल्म ‘वेलकम टू न्यूयॉर्क’ 23 फरवरी को सिनेमाघरों में आ चुकी है। लव रंजन द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ को बॉक्स ऑफिस पर कड़ी टक्कर देने के लिए फिल्म ‘वेलकम टू न्यूयॉर्क’ कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है।

यह एक कॉमेडी फिल्म है, फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा, दिलजीत दोसांझ और करण जौहर के अलावा राणा दग्गुबत्ती, रितेश देशमुख, लारा दत्ता, बोमन ईरानी भी अहम भूमिका निभाते नजर आएं। फिल्म में सलमान खान और सुशांत सिंह राजपूत ने कैमियो किया है। सोनाक्षी सिन्हा और दिलजीत दोसांझ की ये कॉमेडी फिल्म 3D में है।

कहानी-

फिल्म की कहानी न्यूयॉर्क में होने वाले आईफा अवार्ड्स से शुरू होती हैं जिसके लिए एक कांटेस्ट रखा जाता है और 2 लोगों को कॉन्टेस्ट के द्वारा चुनकर आईफा अवार्ड्स में आने का मौका मिलता है। पहला शख्स तेजी संधू (दिलजीत दोसांझ) होता है जिसे एक्टिंग का बहुत शौक है और हमेशा एक्टिंग करता हुआ नजर आता है, वहीं दूसरी चुनी गयी लड़की होती हैं जीनल पटेल (सोनाक्षी सिन्हा) जो एक दर्जी के रूप में काम करती हैं। तेजी और जीनल आइफा अवार्ड्स देखने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचते हैं तो वहां कार्यक्रम के आयोजकों (बमन ईरानी और लारा दत्ता भूपति) के बीच पहले से ही आपसी नोंकझोंक होती है, वहीं दुसरे ट्रैक पर करण (करना जौहर) और अर्जुन (करण जौहर) के बीच की दुश्मनी कहानी में बदलाव लाती है। बहुत सारे ट्विस्ट टर्न्स आते हैं और अंततः एक रिजल्ट आता है।

डायरेक्शन-

ऐसा लगता है कि डायरेक्टर दबाव बनाकर दर्शकों को हंसाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि ये कहना भी जरूरी है तोलेती ने एकदम नये आइडिया पर काम किया है, लेकिन इसे दिखाने के लिए जितनी कसी हुई तैयारी की जरूरत थी, उतनी नहीं की गई है। ये फिल्म काफी मनोरंजक साबित हो सकती थी। फिल्म की पंचलाइन है ब्रिंग ऑन द मैडनेस, लेकिन ये फिल्म इस पंचलाइन पर खरी नहीं उतरती है।

कमजोर कड़ी-

फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी है जिसमें आप दिमाग नहीं लगा सकते। लॉजिक से हटकर ये फिल्म है। वहीं फिल्म के गानों ने भी रिलीज से पहले कोई सरप्राईज नहीं दिया है। यही कारण है कि ज्यादातर ऑडियंस इसे टीवी पर देखने का इंतजार करेगी। एक तरह से अवार्ड शो के दौरान ही फिल्मांकन करके एक पंथ दो काज वाला काम करने की कोशिश की गई है लेकिन वो पूरी तरह से नाकाम लगती है। ये बड़ी अच्छी फिल्म बन सकती थी क्योंकि इसमें पूरी तरह से बॉलीवुड के एक्टर्स के विजुअल्स मौजूद थे लेकिन वो कहते हैं न कि आपके पास बहुत अच्छे बैट्समैन और सबसे तेज गेंदबाज होते हुए भी कभी-कभी आपकी टीम हार जाती है। वैसा ही कुछ वेलकम तो न्यूयॉक के साथ हुआ है। सलमान खान, सुशांत सिंह राजपूत, डबल रोल में करण जौहर, दिलजीत दोसांझ जैसे एक्टर्स की मौजूदगी के बावजूद फिल्म निराश करती है।

क्यों देखें:

रितेश देशमुख और दिलजीत आपको सबसे ज्यादा हंसाते हैं। करण जौहर डबल रोल में हैं, राणा डग्गुबत्ती के भलाल वाले जोक्स, सुशांत सिंह राजपूत को धोनी मानने पर होने वाला कन्फ्यूजन, दिलजीत दोसांझ का हद से ज्यादा फिल्मी होना फिल्म को मजेदार बनता है। सोनाक्षी ने भी ठीकठाक काम किया है। बमन ईरानी और लारा दत्ता ने भी सहज अभिनय किया है।


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