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हलवा के साथ Budget 2018-19 की तैयारी शुरू, जानिए क्या होता है हलवा सेरेमनी

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 20 , 2018 , 17:47 IST

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के हलवा बनाने के साथ ही बजट 2018-19 के दस्तावेजों की छपाई का काम शुरू हो गया है। इसी हलवा सेरेमनी के बाद प्रिंटिंग प्रेस के तमाम कर्मचारियों समेत वित्त मंत्रालय के 100 अधिकारियों को बजट पेश होने तक नजरबंद कर दिया जाएगा। मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने इसकी जानकारी ट्वीट के जरिए दी है। इस बार केंद्र सरकार 1 फरवरी को आम बजट पेश करेगी।

क्या है हलवा सेरेमनी

बजट पेश होने से पहले एक अहम हलवा सेरेमनी होती है जिसके बाद आधिकारिक तौर पर बजट छपाई के लिए भेजा जाता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का ये 5 वां बजट है और वो उन्होनें 5वीं बार हलवा सेरेमनी अटैंड की है। हर साल बजट पेश होने से पहले हलवा सेरेमनी होती है जिसके पीछे कहा जाता है कि हर शुभ काम की शुरुआत मीठे से करनी चाहिए और भारतीय परंपरा में हलवे को काफी शुभ माना जाता है। हलवा सेरेमनी के तहत मौजूदा वित्त मंत्री खुद बजट से जुड़े कर्मचारियों, बजट की छपाई से जुड़े कर्मचारियों और वित्त अधिकारियों को हलवा बांटते हैं। इस हलवे के बनने और बंटने के बाद ही बजट के दस्तावेजों के छापने की प्रक्रिया शुरू होती है।

इस साल 1 फरवरी को बजट पेश होने जा रहा है। सरकार और वित्त मंत्री से उम्मीदें लगनी शुरू हो गई हैं। कुछ खबरों के मुताबिक इस बजट में मिडिल क्लास के लिए तोहफे आ सकते हैं। सबसे बड़ा तोहफा होगा टैक्स छूट की सीमा में बढ़ोतरी।

सरकार की सबसे बड़ी चिंता क्या होगी?

फिलहाल, 2.5 लाख रुपये की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं लगता है। उम्मीद है कि इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपए किया जा सकता है। लेकिन वित्तमंत्री के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है कि देश में टैक्स देने वालों की सबसे बड़ी तादाद 2.5 लाख से 5 लाख रुपए वाली आमदनी वाला ही ग्रुप है, और इस ग्रुप को बजट से काफी उम्मीदें भी हैं।

क्या वित्तमंत्री रिस्क लेंगे?

2015-16 में 3.7 करोड़ लोगों ने रिटर्न फाइल की थी। इसमें से 1.95 करोड़ लोगों ने अपनी आमदनी 2.5 से 5 लाख रुपए बताई थी। ऐसे में छूट की सीमा में 50 हजार रुपए की बढ़ोतरी से जहां लाखों करदाताओं को फायदा होगा लेकिन सरकारी खजाने को नुकसान होगा। ऐसे समय में क्या वित्तमंत्री राजस्व में कमी का रिस्क लेंगे? जानकारों का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद से देश में मिडिल क्लास का मूड थोड़ा खराब है। ऐसे में जब लोकसभा चुनाव 2019 में होना है इसीलिए सरकार इस बड़े तबके को खुश करने की कोशिश करेगी।

सेविंग्स पर मिलने वाले ब्याज में कमी

मिडिल क्लास की एक और चिंता है सेविंग्स पर मिलने वाले ब्याज में कमी। फिक्स्ड डिपॉजिट पर तो ब्याज कम मिल ही रहे हैं, इसके अलावे स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स पर भी रिटर्न में लगातार कमी हो रही है। ऐसे में संभव है कि फिक्स्ड डिपॉजिट करने वालों को कोई राहत मिले। फिलहाल, पांच साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट करने पर टैक्स में छूट मिलती है जबकि ELSS जैसी स्कीम पर 3 साल के निवेश पर टैक्स में राहत मिलती है। बैंकिंग सेक्टर्स की बहुत दिनों से मांग रही है कि फिक्स्ड डिपॉजिट करने वालों को भी सामान राहत मिले।

टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने के पीछे लॉजिक क्या है?

टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने के पीछे ये तर्क है कि लोगों के पास ज्यादा पैसे बचेंगे तो कंजप्शन में बढ़ोतरी होगी जिसका फायदा अर्थव्यवस्था को होगा। विकास दर बढ़ने से सरकार का राजस्व कलेक्शन अपने आप ही बढ़ जाएगा। अब वित्तमंत्री को ये फैसला लेना है कि अगर छूट की सीमा बढ़ाई गई तो क्या राजस्व में कमी को सरकारी खजाना झेलने को तैयार है?


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