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चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू दोषी करार, जगन्नाथ मिश्रा समेत 12 बरी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 19 , 2018 , 14:08 IST

यहां की एक विशेष सीबीआई अदालत ने चारा घोटाले के चौथे मामले में राष्ट्रीय जनता दल(राजद) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को दोषी करार दिया है। इसी मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया। इस तरह अब तक चारा घोटाले के 6 में से 4 केस में लालू दोषी करार दिए जा चुके हैं।

दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया है। उनके साथ महेंद्र सिंह बेदी, अधीप चंद, ध्रुव भगत और आनंद कुमार भी बरी कर दिए गए हैं। मामले में लालू की सजा पर बहस 21, 22 और 23 मार्च को होगी।

लालू को दोषी करार दिए जाने के बाद आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, 'अजब है नरेंद्र मोदी और नीतीश का मेल, अजब है खेल, दोबारा से हो गया जगन्नाथ मिश्रा रिहा और लालू यादव को जेल। एक आदमी को जेल, एक आदमी को बेल, ये है नरेंद्र मोदी का खेल।'

लालू यादव इन दिनों बीमार चल रहे थे और उन्हें रांची इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में भर्ती कराया गया था। वह पिछले तीन दिनों से हॉस्पिटल में भर्ती थे। फैसले के वक्त लालू कोर्ट में मौजूद थे। इससे पहले शनिवार को ही चारा घोटाले के चौथे मामले में फैसला आने वाला था, जिसे टाल दिया गया था।

यह है मामला-:

बता दें, यह मामला दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़ा है। दुमका कोषागार से करीब 3.76 करोड़ रुपये की अवैध निकासी को लेकर सीबीआई ने 1996 में एफआईआर दर्ज की थी। राशि की निकासी 1995 से 1996 के बीच हुई थी। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को रिपोर्ट दर्ज की थी। चारा घोटाले में लालू प्रसाद के खिलाफ पांच मुकदमे सीबीआई ने दर्ज किए है।

चौथा केस ये है-: 

लालू यादव पहले से ही चारा घोटाला के तीन अन्य मामलों में दोषी ठहराये जाने के बाद से रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। चारा घोटाले का ये चौथा यानी दुमका कोषागार केस 3 करोड़ 13 लाख रुपये के गबन का है। इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने 5 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, शुक्रवार को अदालत ने बिहार के तत्कालीन महालेखा परीक्षक समेत महालेखाकार कार्यालय के तीन अधिकारियों के खिलाफ इसी मामले में मुकदमा चलाए जाने की लालू प्रसाद की याचिका स्वीकार कर ली थी। जिसके बाद तीनों को समन जारी करने का निर्देश दिया गया। लालू ने इन तीनों को भी नोटिस जारी कर इस मामले में अभियुक्त बनाने का अनुरोध किया था।

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लालू प्रसाद ने अपने वकील के माध्यम से पूछा था कि अगर इतना बड़ा घोटाला बिहार में हुआ तो उस दौरान 1991 से 1995 के बीच बिहार के महालेखाकार कार्यालय के अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?


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