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SBI के पूर्व चेयरपर्सन का ख़ुलासा, नोटबंदी के लिए बैंकों को दिया गया समय काफी नहीं था

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 27 , 2017 , 11:17 IST

क्या नोटबंदी की तैयारी के लिए बैंकों को और समय देना चाहिए था? स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य इस बात से सहमत नजर आईं, गुरुवार को उन्होंने कहा कि नोटबंदी के दौरान बैंकों पर काफी दबाव बढ़ा है ऐसे में इसकी तैयारी के लिए और समय दिया जाना चाहिए था।

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बैंकों को नहीं मिला तैयारी का मौका

अरुंधति ने एक अंग्रेजी मैग्जीन के एक कार्यक्रम में कहा, अगर हम किसी नई तरह की चीज के लिए तैयार होते हैं, तब ये ज्यादा सार्थक और बेहतर होता। साफ तौर पर अगर नोटबंदी के लिए थोड़ी अधिक तैयारी का मौका मिलता तो निश्चित तौर से इसका हम पर दबाव कम होता।

बैंकों को कैश लाने के लिए बड़ा लॉजिस्टिक तैयार करना होता है

उन्होंने कहा, अगर आपको कैश लाना ले जाना होता है, उसके कुछ नियम है। हमें पुलिस की जरूरत होती है। काफिले की व्यवस्था करनी होती है। नजदीकी रास्ता चुनना होता है। ये बड़ा लाजिस्टिक काम होता है।

'आकलन के लिए समय की जरूरत'

देश के सबसे बड़े बैंक की चेयरपर्सन पद से रिटायर्ड हुई अरुंधति के मुताबिक इस बात का आकलन करने के लिए और समय की जरुरत है कि नोटबंदी सही कदम था या नहीं। नोटबंदी के फायदे के बारे में उन्होंने कहा कि इससे करदाताओं की संख्या 40 प्रतिशत बढ़ी, और डिजिटलीकरण भी बढ़ा है। अरुंधति ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि कालाधन रखने वाले बच पाएंगे। टेक्नोलॉजी लाखों खातों के विश्लेषण करने में मदद करेगी। कालाधन रखने वालों को पता है कि वे जांच के घेरे में हैं।

पिछले साल हुई थी नोटबंदी

बता दें नोटबंदी के फैसले के एक साल पूरे होने वाले हैं। पिछले साल 8 नवंबर को पीएम मोदी ने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को हटाने के फैसले का ऐलान किया था। बताया गया था कि इसका मकसद कालाधन, भ्रष्टाचार और फर्जी करेंसी पर लगाम कसना है।\

6 अक्टूबर को खत्म हुआ अरुंधति का कार्यकाल

बता दें कि अरुंधति भट्टाचार्य के कार्यकाल को पिछले साल 1 साल के लिए बढ़ाया गया था, जो 6 अक्टूबर को खत्म हुआ। 7 अक्टूबर से रजनीश कुमार ने उनकी जगह ली है। रजनीश का कार्यकाल 3 साल का है।

 


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