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रेल पटरी से होकर अब हाईवे पर पहुंचा गुर्जर आंदोलन, रोड पर मनाएंगे देवनरायण जयंती

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| फरवरी 12 , 2019 , 14:03 IST

राजस्थान में गुर्जरों का आरक्षण के लिए आंदोलन सोमवार को चौथे दिन भी जारी रहा। गुर्जर नेता मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर पटरियों पर बैठे रहे जिसके चलते कई प्रमुख ट्रेन रद्द कर दी गई या उनके मार्ग में बदलाव किया गया। राज्य में कई सड़क मार्ग भी बंद रहे। गुर्जर नेता विजय बैंसला ने सोमवार को एक बार फिर दोहराया कि सरकार को वार्ता के लिए मलारना डूंगर में रेल पटरी पर ही आना होगा और आंदोलनकारी वार्ता के लिए कहीं नहीं जाएंगे।

रेलवे ट्रैक के बाद अब हाईवे पर शुरू हुआ गुर्जर आंदोलन

रेल ट्रैक से शुरू हुआ गुर्जरों का आंदोलन अब सीकर, दौसा, झुंझुनूं, बूंदी और टोंक तक फैल गया है। मंगलवार यानी की आज गुर्जरों के आराध्य देवनारायण की जयंती है। और अब गुर्जरों ने हाईवे पर ही जयंती मनाने का ऐलान कर दिया है और यह भी कहा है कि मांग स्वीकार न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

यहां के लिए रोक दी गई है रोडवेज बसें

सोमवार को गुर्जरों ने जयपुर से जुड़ने वाले पांच सड़क मार्गों पर जाम लगाया था। इसके कारण जयपुर से सवाई माधोपुर, टोंक, आगरा समेत कई इलाकों के लिए रोडवेज बसें वहीं चलीं। जयपुर में 200 और अजमेर में 14 रोडवेज बसों का संचालन नहीं हुआ। 26 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीय़ 10 से अधिक ट्रेनों के मार्ग बदलने पड़े। ऐसे में करीब एक लाख यात्रियों को परेशानी हुई। आंदोलन खत्म करने को लेकर सरकार की तरफ से भी कोई खास पहल नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री ने की बैठक

सोमवार राज 12 बजे मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक समेत आला अफसरों के साथ बैठ की। इसमें गुर्जर आंदोलन की रोकथाम और समाधान पर चर्चा की गई। बैठक रात एक बचे तक चली। मुख्यमंत्री मंगलवार को भी आधिकारियों से चर्चा करेंगे।

बढ़ाई गई सुरक्षा

प्रशासन ने भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक में सुरक्षा बढ़ा दी है। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से अतिरिक्त सुरक्षा बल मंगवाया गया है। आठ जिलों में राजस्थान सशस्त्र बल की 17 कंपनियों की तैनात की गईं। रेलवे स्टेशन और ट्रैक की भी सुरक्षा की जा रही है।

क्या है गुर्जरों की मांग

गुर्जरों की मांग है कि सरकार सभी प्रक्रिया पूरी करके 5% आरक्षण बैकलॉग के साथ गे। 24 सितंबर 2015 को विधानसभा में एसबीसी विधेयक पारित हुआ था। राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर 2015 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए इसे लागू किया था। ये 14 महीने चला और 9 दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट ने खत्म किया। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है।


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