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फ्रांस के NGO ने दर्ज कराई शिकायत, पूछा- किस आधार पर Dassault ने रिलायंस को चुना

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 24 , 2018 , 13:05 IST

फ्रांस के एक एनजीओ ने राफेल डील में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए देश के आर्थिक अभियोजक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। आर्थिक अपराधों के खिलाफ लड़ने वाले एनजीओ शेरपा ने अभियोजक से डील में भ्रष्टाचार के कथित आरोपों की जांच के लिए कहा है। इसके अलावा किन शर्तों पर भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमान बेचने का समझौता हुआ और इसके लिए दैसो ने अंबानी की कंपनी को किस आधार पर ऑफसेट पार्टनर चुना, इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

एनजीओ का कहना है कि राफेल मामले में भारत में एक पूर्व मंत्री और एक भ्रष्टाचारनिरोधी वकील ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अधिकारों का दुरुपयोग और गलत तरीके से लोगों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए। फ्रेंच मैगजीन मीडियापार्ट और उसकी अपनी जांच में भी कुछ और तथ्य निकले, जिसके बाद फ्रांस में यह शिकायत दर्ज कराई गई।

अक्टूबर में दर्ज कराई गई शिकायत

एनजीओ ने अपने प्रेस रिलीज में कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि देश का आर्थिक अभियोजक कार्यालय मामले में भ्रष्टाचार, व्यापार में प्रभाव बनाने और गलत तरीके से फायदा पहुंचाए जाने के आरोपों की गंभीरता से जांच करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनजीओ शेरपा ने राफेल डील की अनियमितताओं की शिकायत अक्टूबर के अंत में ही दर्ज करा दी थी।

डील को लेकर जवाब दे चुके हैं दैसो के सीईओ

राफेल बनाने वाली कंपनी दैसो के सीईओ एरिक ट्रेपिए डील में गड़बड़ी के आरोपों को पहले ही नकार चुके हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में ट्रेपिए ने कहा था कि रिलायंस डिफेंस को दैसो ने खुद ही पार्टनर चुना। उन्होंने बताया था कि रिलायंस के अलावा हमारे 30 दूसरे पार्टनर भी हैं। दरअसल राहुल ने आरोप लगाया था कि राफेल सौदे के लिए दैसो और रिलायंस के ज्वाइंट वेंचर के बारे में ट्रेपिए ने झूठ बोला था। राहुल ने कहा था, “मोदी सरकार ने पक्षपात कर अनिल अंबानी की घाटे में चल रही कंपनी को राफेल डील दिलवाई। उन्होंने कंपनी पर मोदी सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप भी लगाया था। ट्रेपिए ने इन आरोपों पर दुख जताते हुए कहा था कि उनकी कंपनी किसी पार्टी के लिए काम नहीं करती।

भारत-फ्रांस के बीच 36 राफेल की डील

भारत-फ्रांस सरकार के बीच सितंबर 2016 में राफेल डील हुई थी। इसके तहत फ्रांस भारत को 36 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान देगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा 7.8 करोड़ यूरो (करीब 58 हजार करोड़ रु.) का है। पहला राफेल सितंबर 2019 में मिलेगा।


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