विज्ञान/टेक्नोलॉजी

मिशन गगनयान: एयरफोर्स को ISRO ने दी 10 अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1728
| फरवरी 11 , 2019 , 16:59 IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO ने भारतीय वायुसेना को भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष गगनयान के 10 क्रू मेंबर्स के चुनाव और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। खबरों की माने तो ISRO के चेयरमैन के. सिवन ने कहा, 'हमने क्रू सिलेक्शन एवं ट्रेनिंग से जुड़े सभी मानदंडों और जरूरतों को तय कर दिया है और इसे इंडियन एयरफोर्ट को सौंप दिया गया है। ट्रेनिंग के पहले 2 चरण इंडियन एयरफोर्ट के इंस्टिट्यूट ऑफ एरोस्पेस मेडिसिन (बेंगलुरु) में होंगे और उसके बाद आखिरी चरण की ट्रेनिंग विदेश में होगी।'

क्रू में कितने सदस्य शामिल होंगे, इस सवाल के जवाब में सिवन ने कहा, हम चाहते हैं कि एयरफोर्स गगनयान मिशन के लिए 10 कैंडिडेट को प्रशिक्षित करें। उनमें से 3 को हम अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए चुनेंगे।' क्रू की विदेश में ट्रेनिंग के सवाल पर चेयरमैन ने कहा कि उनके दिमाग में रूस, फ्रांस जैसे 2-3 देश हैं लेकिन अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

आर्म्ड फोर्सिज मेडिकल सर्विसेज से जुड़ा इंस्टिट्यूट ऑफ एरोस्पेस मेडिसिन (IAM) भारत और दक्षिण-पुर्वी एशिया का इकलौता ऐसा संस्थान है जो एरोस्पेस मेजिसिन के क्षेत्र में रिसर्च करता है। यह ऐरोस्पेस मेडिसिन पर रिसर्च करता है और पायलटों को प्रशिक्षित करता है। पहले इस इंस्टिट्यूट का नाम एविएशन मेडिसिन था और इसने 1980 के दशक में भारत-सोवियत रूस के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को मेडिकल सपोर्ट दिया था।

एक एजेंसी की रिपोर्ट की माने तो, आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज के डायरेक्टर जनरल बिपिन पुरी ने कहा है कि IAM में मोजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर आधुनिक है और इसी वजह से ISRO चाहता है कि यह गगनयान मिशन के लिए क्रू मेंबर्स को प्रशिक्षित करे।

गौरतलब हो कि पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम नरेंद्र मेदी ने घोषणा किया था कि भारत गगनयान के जरिए 2022 तक एक अंतरिक्ष यात्री को भेजने की कोशिश करेगा। इसके सफल होने पर भारत चौथा राष्ट्र बन जाएगा। गगनयान टीम के प्रथम मानवरहित मिशन की योजना दिसंबर 2020 के लिए है। और अंतरिक्ष में प्रथम मानव को दिसंबर 2021 तक भेजा जाएगा।


कमेंट करें