गणेश चतुर्थी: 13 सितंबर से शुरू होगा बप्पा का महोत्सव, शहरों की सजावट में आई तेजी

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 6 , 2018 , 15:30 IST

गणेश चतुर्थी के त्योहार की तैयारियां जोर शोर के साथ शुरू हो गई है। इस साल गणेश चतुर्थी 13 सितंबर से शरू हो रही है जो 23 सितंबर तक चलेगी। गणेश उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतर्दर्शी तक यानी दस दिनों तक चलता है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग गणपति बप्पा की घर में स्थापना करते हैं। गणेश चतुर्थी का त्योहार आते ही बप्पा के भक्त ढोल नगाड़ों के साथ भगवान गणेश को अपने घर लाने में जुट जाते हैं। इस मौके पर लोग गणपति बप्पा की पूजा अर्चना कर उनसे अपने घर में सुख शांति बनाए रखने की कामना करते हैं।

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पूजा का समय-:

13 सितंबर मध्याह्न गणेश पूजा का समय - 11:03 से 13:30
गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त गणेश चतुर्थी 13 सितंबर 2018, गुरुवार को है। 23 सितंबर 2018, रविवार को अनंत चतुर्दशी है जिस दिन गणेश विसर्जन होगा। मध्याह्न काल में गणेश पूजन का समय = 11:03 से 13:30 तक।

गणेश चतुर्थी चंद्र दर्शन टाइम 12 सितंबर 2018,

बुधवार को चांद नहीं देखने का समय = 16:07 से 20:33 बजे तक।

13 सितंबर 2018, वीरवार को चांद नहीं देखने का समय = 09:31 से 21:12 बजे तक।

चतुर्थी तिथि आरंभ = 12 सितंबर 2018, बुधवार 16:07 बजे।

चतुर्थी तिथि समाप्त = 13 सितंबर 2018, गुरुवार 14:51 बजे।

विघ्नों के नाश व मंगल विधान के लिए मंत्र -:

गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌।
                                                             (पद्म पु. पृ. 61।31-33)

'गणपति, विघ्नराज, लम्बतुण्ड, गजानन, द्वैमातुर, हेरम्ब, एकदन्त, गणाधिप, विनायक, चारुकर्ण, पशुपाल और भवात्मज- ये बारह गणेशजी के नाम हैं। जो प्रातःकाल उठकर इनका पाठ करता है, संपूर्ण विश्व उनके वश में हो जाता है तथा उसे कभी विघ्न का सामना नहीं करना पड़ता।'

धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से किसी भी शुभ कार्य में कोई विघ्न, बाधा नहीं आती है। इसलिए हर कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा करने का विधान है।

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गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर भक्त भगवान गणेश जी के लिए उनका प्रिय मोदक बनाते हैं। लोग तरह-तरह के मोदक बनाकर गणेश जी को प्रसन्न करते हैं।

लखनऊ में गोमती किनारे विराजेंगे सबसे बड़े बप्पा -:

सबसे बड़े बप्पा ‘मनौतियों के राजा’ गोमती किनारे झूलेलाल घाट पर विराजेंगे। आयोजन से जुड़े सतीश अग्रवाल ने बताया कि हर साल करीब 1 लाख मनौतियों की चिट्ठियां पाने वाले बप्पा के दरबार में करीब 5 लाख भक्तों के जुटने की उम्मीद है।

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हर साल की तरह इस बार भी गणेश पूजा पंडाल अलग थीम पर तैयार किया जा रहा है। एक बार बन चुके पंडाल को खोलकर नई थीम पर सजाया जा रहा है। इस बार भी गणेश प्रतिमा का भू-विसर्जन होगा ताकि लोगों को संदेश जाए कि नदियों को प्रदूषित नहीं करना है। श्रीगणेश प्राकट्य महोत्सव में गृहमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के आने की उम्मीद है।

मूर्तिकार दे रहें हैं मूर्तियों को अंतिम रूप-:

महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी के आयोजन के लिए मुंबई समेत तमाम जिलों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक ओर जहां मूर्तिकार गणपति बाप्पा की मूर्तियों को अंतिम रूप देने मे जुटे हुए हैं, वहीं राजधानी समेत सभी जिलों में गणेश पंडाल लगाने की तैयारियां जोरों पर हैं। बाजार भी इसके लिए तैयार हो गया है।

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ईको फ्रेंडली मूर्तियों का चलन बढ़ा -:

महाराष्ट्र समेत देश भर में ईको फ्रेंडली मूर्तियों का चलन बढ़ने से इस बार गणेशोत्सव के लिए प्रतिमाओं की कीमत बढ़ गई है। लेकिन खास बात यह है कि श्रद्धालुओं का रुझान इनकी ओर अधिक है। पर्यावरण के लिए हानिकारक प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों की मांग कम होने लगी है। इसी के चलते शाहू मिट्टी से बनी मूर्तियों की मांग बढ़ती जा रही है। इसके चलते शाहू की मिट्टी के दाम भी बढ़ गए हैं।