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बर्थडे: शोहरत तो खूब मिली लेकिन ताउम्र मोहब्बत के लिए भटकती रहीं मीना कुमारी

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 1 , 2018 , 20:46 IST

"उदासियों ने मिरी आत्मा को घेरा है
रूपहली चाँदनी है और घुप अंधेरा है
कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू
जो मेरी रात थी वो आप का सवेरा है"

(मीना कुमारी 'नाज़')

पीड़ा को परदे पर और अपने जीवन में समान रूप से जीने वाली अदाकारा मीना कुमारी को जन्मदिन पर नमन।

गूगल ने जिसे डूडल बनाकर आज जिसे याद किया है वो बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी (Meena Kumari) है। डूडल में मीना कुमार साड़ी लुक में नजर आ रही हैं। गूगल के डूडल पर बनी तस्वीर में भी मीना कुमार के चेहरे पर दर्द साफ नजर आता है। अपनी खूबसूरती व अदाकारी के साथ-साथ अपने शायरी लिखने के अंदाज से सबको दीवाना बना देने वाली मीना कुमारी भले ही आज हमारे बीच ना हों पर उनके नग्में आज भी हम गुनगुनाते हैं। 

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तीन दशकों तक बॉलीवुड पर राज करने वाली मीना कुमारी ने कई फिल्मों में ऐसा अभिनय किया कि उन्हें 'साहब बीवी और गुलाम' के गीत 'न जाओ सैयां छुड़ाके बैयां..' के लिए आज भी याद किया जाता है।

हिन्दी फिल्मों का ट्रेजडी क्विन-:

मीना कुमारी का जन्म मुंबई में 1 अगस्त, 1932 को हुआ था। उनका असली नाम महजबीं बानो था। मीना के पिता अली बख्स पारसी रंगमंच के कलाकार थे और उनकी मां थियेटर कलाकार थीं। बचपन से लेकर पूरी जिंदगी दर्द के बीच बिताने वाली मीना कुमारी का बचपन बहुत ही तंगहाली में गुजरा था। उन्होंने जीवन के दर्द को जीया इसलिए उनकी फिल्मों में कोई भी दुख का दृश्य उनके अभिनय से जीवंत हो उठता था। मीना कुमारी की फिल्‍में दर्द भरी होती थीं इसलिए उन्हें हिंदी फिल्मों की ट्रेजिडी क्वीन कहा जाता है।

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छोटी सी उम्र में घर का भार कंधे पर उठाकर बनीं सुपरस्टार-:

मीना कुमारी ने छोटी उम्र में ही घर का सारा बोझ अपने कंधों पर ले लिया। सात साल की उम्र से ही फ़िल्मों में काम करने लगीं। 1952 में आई फ़िल्म ‘बैजू बावरा’ से वे रातों-रात स्‍टार बन गईं। परिणीता, दिल अपना प्रीत पराई, श्रद्धा, आजाद, कोहिनूर।।।बहरहाल, 1960 तक आते-आते वह एक बहुत बड़ी स्‍टार बन गई थीं।

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एक पर्स की वजह से बिखर गई थी मीना कुमारी की शादी शुदा जिंदगी!

दिल्ली प्रेस की ‘सरिता’ पत्रिका में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, मीना कुमारी और कमाल अमरोही ने एक-दूसरे के साथ प्रेम किया। एक-दूसरे को चाहा और शादी भी कर ली। लेकिन यह पुरुषवादी मानसिकता थी या सामाजिक रूढ़ियां, फिल्मी दुनिया की यह कमाल की हसीन जोड़ी, एक साथ सुखी जीवन न बिता सकी। सरिता में छपा एक किस्सा, दोनों के प्रेम के बीच ‘फूट’ पड़ने के किस्से को बयां करता है।

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हुआ यूं था कि वर्ष 1955 में फिल्म ‘परिणीता’ के लिए मीना कुमारी को फिल्मफेयर का पुरस्कार मिलना था। कमाल अमरोही और मीना कुमारी एक ही साथ दर्शक दीर्घा में बैठे थे। मीना कुमारी स्टेज पर अवार्ड लेने गईं तो अपना पर्स कुर्सी पर ही भूल गईं। स्टेज से उतरकर वह सीधा अपने घर चली गईं। बाद में अभिनेत्री निम्मी ने वह पर्स मीना कुमारी को जाकर दिया। मीना ने इस पर कमाल से पूछा कि आपको मेरा पर्स नजर नहीं आया? यह सुनकर कमाल अमरोही बोले- मैंने पर्स देखा था, पर उठाया नहीं। क्योंकि आज मैं तुम्हारा पर्स उठाता, कल जूते। कहते हैं इसी प्रकरण के बाद दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी।

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शायरी और शराब में बसा ली थी मीना कुमारी ने अपनी जिंदगी-:

कहते हैं, कमाल अमरोही के साथ प्रेम और शादी करना मीना कुमारी की अपनी पसंद का काम था। लेकिन यह भी एक हैरानी की ही बात है कि दो प्रेम करने वालों के बीच इतनी दूरी बन गई कि तीन तलाक की नौबत तक आ पहुंची। कमाल अमरोही के तलाक देने के बाद मीना कुमारी का जीवन एक तरह से बेपटरी हो गया था। हालांकि इसके बावजूद वह फिल्में करती रहीं, लेकिन लोग बताते हैं कि पति से अलग होने के बाद उनके जीवन में फिर वह रौनक कभी नहीं आ सकी, जिसके ख्वाब मीना कुमारी ने सजाए थे।

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मीना कुमारी को शेर-ओ-शायरी करना, गजलें लिखने का शौक था। कमाल से तलाक के बाद वो अक्सर गजलें लिखा करती थीं। सरिता पत्रिका के अनुसार, 1964 में जब कमाल अमरोही ने उन्हें तलाक दिया, तो मीना ने लिखा, ‘तलाक तो दे रहे हो नजर-ए-कहर के साथ, जवानी भी मेरी लौटा दो मेरे मेहर के साथ।’

दुनिया को कह दिया अलविदा-:

मीना कुमारी तलाक के बाद भी कमाल अमरोही के फ़िल्म पाकीजा का हिस्सा बनी रहीं। 14 साल बाद 4 फरवरी, 1972 को फ़िल्म पर्दे पर आई। तब तक मीना की हालत काफी बिगड़ गई थी। बीमारी की हालत में भी वह लगातार फ़िल्में कर रही थीं। 31 मार्च 1972 को लिवर सिरोसिस के चलते मीना कुमारी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

आइए आपको सुनाते हैं मीना कुमारी के कुछ गाने जो आज भी उनकी यादों को जिंदा कर जाते हैं-:

फिल्म 'दिल अपना और प्रीत पराई' का ये सांग 'अजीब दास्तां है ये'-:

फ़िल्म: काजल का गाना-'छू लेने दो नाज़ुक होठों को'-:

फ़िल्म: पाकिजा का गाना-'चलते-चलते'-:


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