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गोवर्धन पूजा का ये है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 20 , 2017 , 12:53 IST

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। गोवर्धन को 'अन्नकूट पूजा' भी कहा जाता है। सामान्य भाषा में कहा जाए तो दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा की बजाय गोवर्धन की पूजा शुरू करवाई थी। इस दिन गोबर घर के आंगन में गोवर्धन पर्वत की चित्र बनाकर पूजन किया जाता है। इस दिन गायों की सेवा का विशेष महत्व है। गोवर्धन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रदोष काल में माना गया है।

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अन्नकूट शब्द का अर्थ

अन्नकूट शब्द का अर्थ होता है अन्न का समूह। विभिन्न प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस पर्व का नाम अन्नकूट पड़ा है। इस दिन बहुत प्रकार के पकवान, मिठाई आदि का भगवान को भोग लगाया जाता है।

गोवर्धन पूजा की कथा

ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा की बजाय लोगों से गोवर्धन की पूजा शुरू करवाई थी। ये पूजा द्वार युग से चली आ रही है। इससे पहले लोग इन दिन इंद्र की पूजा करते थे। एक दिन भगवान कृष्ण ने सवाल किया कि लोग इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? उन्हें बताया गया कि वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती और हमारी गायों को चारा मिलता है। तब श्री कृष्ण ने कहा ऐसा है तो सबको गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं। 

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उनकी बात मान कर सभी ब्रजवासी इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और प्रलय के समान मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा कर ब्रजवासियों की भारी बारिश से रक्षा की थी। इसके बाद इंद्र को पता लगा कि श्रीकृष्ण वास्तव में विष्णु के अवतार हैं। फिर बाद में इंद्रा देवता को भी भगवान कृष्ण से क्षमा याचना करनी पड़ी। इन्द्रदेव की याचना पर भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और सभी ब्रजवासियों से कहा कि अब वे हर साल गोवर्धन की पूजा कर अन्नकूट पर्व मनाए। तब से ही यह पर्व गोवर्धन के रूप में मनाया जाता है।

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गोवर्धन पूजा की विधि

इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाकर उसकी पूजा रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल आदि से दीपक जलाने के बाद की जाती है। गायों को स्नान कराकर उन्हें सजाकर उनकी पूजा करें। गायों को मिष्ठान खिलाकर उनकी आरती कर प्रदक्षिणा करनी चाहिए।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त

- सुबह का मुहूर्त- सुबह 06:28 बजे से 08:43 बजे तक
- शाम का मुहूर्त - 03:27 बजे से सायं 05:42 बजे तक
- प्रतिपदा - रात 00:41 बजे से शुरू (20 अक्टूबर 2017)
- प्रतिपदा तिथि समाप्त - रात्रि 1:37 बजे तक (21 अक्तूबर 2017)

 


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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