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पिछले साल से 50 गुना ज्यादा हुआ सरकारी बैंको को घाटा

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अगस्त 17 , 2018 , 20:21 IST

कर्ज की रकम वापस नही होने के कारण प्रविजनिंग लगातार बढ़ते रहने से पिछले साल के मुकाबले जून तिमाही तक पचास गुना से ज्यादा सरकारी बैकों को लॉस हुआ है। इस बीच फंसे कर्जों के ताजा संचयन (फ्रेश बैड लोन एक्युमुलेशन) की रफ्तार सुस्त पड़ी है क्योंकि लोन डिफॉल्ट के बड़े मामले पहले की तिमाहियों में ही बैंकरप्सी कोर्ट के हवाले किए जा चुके थे।

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 21 पब्लिक सेक्टर बैंकों का कुल घाटा बढ़कर ₹16,600 करोड़ हो गया, जो सालभर पहले सिर्फ ₹307 करोड़ था। इसका पता रेग्युलेटरी फाइलिंग के डेटा से चला है। जून तिमाही में सिर्फ सात बैंकों ने लाभ दिया है जबकि साल भर पहले ऐसे 12 बैंक थे।

बॉन्ड प्राइस में उथलपुथल के चलते हुए ट्रेडिंग लॉस से बैंकों की मुसीबत बढ़ी है, लेकिन आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी के साथ ही प्रमोटरों के रीपेमेंट के बेहतर तौर तरीके अपनाने के चलते बैंकों का डिफॉल्ट्स लेवल बढ़ने के आसार खत्म हो गए हैं। आरबीआई ने एनसीएलटी भेजे जानेवाले लोन अकाउंट्स के रेजॉलुशन की टाइमलाइन 6 से 9 महीने के बीच तय की है। अगर देरी भी होती है तो फाइनैंशल इयर के अंत तक रेजॉलुशन हो ही जाएंगे।'

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एसएमसी इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के बैंकिंग एनालिस्ट सिद्धार्थ पुरोहित  का कहना है कि प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन झेल रहे बैंकों के ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में खासतौर पर ऐसेट क्वॉलिटी के मोर्चे पर कोई सुधार नहीं दिख रहा है।' सरकारी बैंकों का ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (NPA) सालाना आधार पर 19% बढ़ोतरी के साथ ₹7.1 लाख करोड़ रुपये से 8.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है।


इस बीच एनपीए के लिए सरकारी बैंकों का टोटल प्रविजन सालाना आधार पर 28% उछाल के साथ 51,500 करोड़ रुपये हो गया है। 31 मार्च को खत्म तिमाही में सरकारी बैंकों का लॉस अब तक के सबसे ऊपरी लेवल ₹62,700 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। उस तिमाही में घाटे में जानेवाले बैंकों की संख्या 19 थी।

बैंकों के परफॉर्मेंस में तिमाही आधार पर खासा सुधार आया है, लेकिन ऐनालिस्टों का कहना है कि क्राइसिस अभी खत्म नहीं हुआ है। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने भी माना है कि मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'सितंबर में हम प्रविजन कवरेज रेशियो बढ़ाना चाहते हैं ताकि दिसंबर में हमें पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़े और पिछले एनपीए का घाव बचा नहीं रहे।'


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कुलदीप सिंह

Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

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