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NCERT ने किया पॉलिटिकल साइंस में बदलाव, 'मुस्लिम विरोधी दंगे' को लिखा 'गुजरात दंगे'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1965
| मार्च 24 , 2018 , 09:42 IST

गुजरात दंगे को लेकर 12वीं कक्षा की पॉलिटिकल साइंस में जहां पहले ‘मुस्लिम विरोधी दंगे’ शीर्षक के साथ छात्र पढ़ते थे तो वहीं अब वे अपडेट्ड किताब में सिर्फ ‘गुजरात दंगे’ ही पढ़ने को मिलेगा।

नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) टेक्स्ट बुक ‘पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस’अब इसमें बदलाव कर रहा है। खबर के मुताबिक वह इसके चैप्टर के सब-हेड में बदलाव किया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, इसके और इसकी शुरुआती लाइन हटाईं जाएंगी। इतना ही नहीं 2002 के गुजरात हिंसा को लेकर बाकी सारी चीजें वहीं हैं।

किताब के आखिरी पैराग्राफ में ‘Recent Developments in Indian Politics’ नाम के अध्याय में यह बदलाव किया गया है। अब पेज नंबर 187 पर दंगों से संबंधित जो पैराग्राफ छपा है, उसका शीर्षक ‘मुस्लिम विरोधी दंगे’ से बदलकर ‘गुजरात दंगे’ कर दिया गया है। हालांकि, खास बात यह है कि इसी पैराग्राफ में 1984 के सिख दंगों को सिख विरोधी करार दिया गया है।

नए टेक्स्टबुक्स में पैसेज के अंदर दो तरह के बदलाव किये गए हैं। शीर्षक के अलावा पैसेज की पहली शब्द से मुस्लिम शब्द हो भी हटा दिया गया है। पैसेज में इससे पहले पढ़ा जाता था- “फरवरी-मार्च 202 में गुजरात में मुस्लिम के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।” लेकिन, अपडेटेड किताब में अब लिखा है- “फरवरी-मार्च 2002 में बड़ी तादाद में गुजरात के अंदर हिंसा भड़की थी।” 12वीं कक्ष की टेक्स्ट बुक में यह बदलाव साल 2007 में प्रकाशित होने के दौरान किया था जिस वक्त केन्द्र की सत्ता में कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए की सरकार थी।

एनसीईआरटी अधिकारियों के मुताबिक, जिस सिलेबस को स्वीकृति दी गई है जिससे टेक्स्ट बुक्स को तैयार किया जाता है उसमें एंटी-मुस्लिम शब्द की कोई जगह नहीं है। नाम ना बताने की शर्त पर उन्होंने बताया- “इस सिलेबस में साफतौर पर गुजरात हिंसा शब्द का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, टेक्स्ट बुक ने पहले ‘एंटी मुस्लिम’ शब्द को शामिल किया था। जब हमने सिलेबस को अपडेट करना शुरू किया तो इस बारे में हमें बताया गया उसके बाद हमने वहां पर गुजरात हिंसा शब्द का इस्तेमाल किया। ”

बाकी का टेक्स्ट वैसा ही है, जैसा कि पुरानी किताब में है। इसमें घटनाओं का टाइमलाइन बताया गया है। मसलन- कारसेवकों से भरी ट्रेन पर हमला और आगजनी, जिसके बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। किताब में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा दंगों पर नियंत्रण न कर पाने कीके लिए गुजरात सरकार की आलोचना का भी जिक्र है।

इस पैराग्राफ में यह भी लिखा है, ‘अयोध्या से आ रही एक ट्रेन की बोगी जिसमें कारसेवक भरे थे, उसमें आग लगा दी गई। इस आग में 57 लोगों की मौत हो गई। इस वारदात में मुस्लिमों का हाथ होने के शक में अगले दिन से गुजरात के कई हिस्सों में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसक घटनाएं हुईं। यह हिंसा करीब एक महीने चली, जिसमें 11 लोग मारे गए। इनमें अधिकतर संख्या मुसलमानों की थी।’ बता दें कि सरकार ने संसद में जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक,2002 के दंगों में 790 मुस्लिम जबकि 254 हिंदुओं की मौत हुई थी। 223 लोग लापता बताए गए, जबकि 2500 से ज्यादा लोग लापता थे। ये बदलाव पाठ्य पुस्तकों की समीक्षा का हिस्सा है। इस तरह की समीक्षा 2007 से ही चल रही है। एनसीईआरटी एक स्वायत्त संगठन है, जो स्कूली शिक्षा पर मानव संसाधन मंत्रालय को अपने सुझाव देता है। पिछले साल जून में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने इन बदलावों को लेकर पहली बार सुझाव दिया। हालांकि, इस बारे में एनसीईआरटी के डायरेक्टर ऋषिकेष सेनापति से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल या एसएमएस का कोई जवाब नहीं दिया।


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