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पुण्यतिथि विशेष: ज़र्रे से आफ़ताब बनने की कहानी है म्यूजिक किंग गुलशन कुमार की

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| अगस्त 12 , 2018 , 10:15 IST

गुलशन कुमार की कहानी जीरो से हीरो बनने की कहानी है। उन्होंने इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री में ऐसे समय पर कदम रखा जब ये धीरे-धीरे पॉपुलर हो रहा था। वो अपनी मेहनत, दूरदृष्टि और जज्बे से संगीत उद्योग को काफी आगे ले गए। क्या आप जानते हैं गुलशन कुमार ने 1995 में पहली बार सोनू निगम को ब्रेक (बेवफा सनम) से दिया था। गुलशन ने सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनायी जो भारत में सबसे बड़ी संगीत कंपनी बन गई। उन्होंने इसी संगीत कंपनी के तहत, ‘टी-सीरीज’ की स्थापना की। आज, टी-सीरीज देश में संगीत और वीडियोज का सबसे बड़ा उत्पादक है।

गुलशन कुमार की जीवन की कहानी जर्रे से आफताब बनने की कहानी है| गुलशन कुमार ने एक छोटी सी म्यूजिक कैसेट कंपनी से बिजनेस की शुरुआत की थी। गुलशन कुमार को कैसेट किंग के नाम से जाना जाता है। दिल्ली के एक छोटे से इलाके से मुंबई पर राज करने वाले गुलशन कुमार की सफलताएं कई लोगों को रास नहीं आईं और 12 अगस्त 1997 को उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी पुण्यतिथि पर गुलशन कुमार की हत्या से जुड़े कुछ पहलुओं को सामने रखने की कोशिश करते हैं।

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गुलशन दुआ का जन्म पंजाबी परिवार में हुआ। वो दिल्ली के दरियागंज बाजार में फलरस विक्रेता चन्द्रभान के पुत्र थे। उनके पिता चन्द्रभान दुआ दिल्ली के दरियागंज में जूस बेचते थे। बचपन में गुलशन कुमार जूस की दुकान पर अपने पिता का हाथ बंटाते थे और यहीं से बिजनेस में इंटरेस्ट हो गया। जब वे 23 साल के थे तब उन्होंने फैमिली की मदद से एक दुकान को टेकओवर किया और रिकार्ड्स और ऑडियो कैसेट बेचना शुरू किया। यहीं से आगे चलकर उन्होंने नोएडा में अपनी कंपनी खोली और म्यूजिक इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन गए।

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गुलशन कुमार ने अपने ऑडियो कैसेट के बिजनेस को 'सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड' का नाम दिया। जिसे टी-सीरीज के नाम से जाना जाता है। गुलशन कुमार ओरिजिनल गानों को दूसरी आवाजों में रिकॉर्ड कर कम दामों में कैसेट बेचा करते थे। जहां अन्य कंपनियों की कैसेट 28 रुपए में मिलती थी, गुलशन कुमार उसे 15 से 18 रुपए में बेचा करते थे। इस दौरान उन्होंने भक्ति गानों को भी रिकॉर्ड करना शुरू किया और वो खुद भी वो गाना गाया करते थे।

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12 अगस्त 1997 की सुबह गुलशन कुमार हर रोज की तरह अपने एक नौकर के साथ पूजा की सामग्री लेकर मुंबई स्थित लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स के अपने घर से थोड़ी दूर पर स्थित शिव मंदिर में पूजा करने के लिए निकले। उस दिन उनके साथ उनका बॉडीगार्ड भी नहीं था।

गुलशन कुमार ने अपने धन का एक हिस्सा समाज सेवा के लिए दान करके एक मिसाल कायम किया। उन्होंने वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की जो तीर्थयात्रियों के लिए नि: शुल्क भोजन उपलब्ध कराता है।

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गुलशन कुमार हर रोज उस मंदिर में आरती करते थे। उस दिन सुबह ठीक 10.40 पर उन्होंने मंदिर में पूजा समाप्त की और जैसे ही अपनी गाड़ी की तरफ बढ़े, लंबे बालों वाला एक अज्ञात व्यक्ति उनके पास आकर खड़ा हो गया और उसने चिल्लाकर कहा- बहुत पूजा कर ली अब ऊपर जाकर पूजा करना।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस बात को बोलते ही उस आदमी ने गुलशन कुमार को गोली मार दी। गोली सीधे उनके सिर पर लगी।

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इसके बाद वहीं मौजूद और 2 अज्ञात लोगों ने उन पर करीब 16 बुलेट की फायरिंग कर दी और उनके शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया। बाद में इस हत्या का आरोप म्यूजिक कम्पोजर नदीम पर लगाया गया। सूत्रों के अनुसार गुलशन कुमार को मारने के लिए उन लोगों ने शूटर हायर किया था।

हालांकि बाद में विनोद जगताप ने इस हत्या का इल्जाम अपने सिर लिया और उसे उम्र कैद की सजा सुना दी गई। कोर्ट ये साबित नहीं कर पाई कि जगताप कोई कॉन्ट्रैक्ट किलर है।


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