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इस वजह से हिन्दू से मुसलमान बन गए थे ए आर रहमान| 10 बातें

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
1961
| जनवरी 6 , 2018 , 13:45 IST

संगीत के सम्राट ए.आर रहमान आज अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में रहमान ने अपने जादुई संगीत से लोगों का दिल जीता है। वैसे, रहमान जितने बेहतरीन संगीतकार हैं, उतने ही लाजवाब गायक भी। उनकी आवाज में एक अलग ही जादू है जो अजीब ही असर छोड़ता है, जो अलौकिक है। इस आवाज में दक्षिण भारतीय खनक इसे और खूबसूरत बना देती है।

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में 6 जनवरी 1966 को जन्मे अल्लाह रक्खा रहमान (एआर रहमान) ने कम उम्र में ही सिंगिंग शुरू कर दी थी। बीबीसी के एक रिपोर्ट के मुताबिक रहमान ने अपने लगभग 150 मिलियन म्यूजिक कॉपियां बेच चुके हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने 6 भाषाओं में 100 से अधिक फिल्मों में साउंडट्रैक और एल्बम लॉन्च किया है। उन्होंने इंटरनेशनल लेवल के माइकल जैक्सन, डिडो, अकॉन, नुसरत फतेह अली खान समेत कई म्यूजिक कलाकार के साथ भी काम कर चुके हैं।

बहन की बीमारी ने रहमान की जिंदगी को दिया नया मोड़-

जन्म से हिंन्दू रहे रहमान की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जब साल 1989 में उनकी छोटी बहन की तबियत काफी बिगड़ गई। हालात ये थे कि सभी डॉक्टर ने उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। भले ही डॉक्टरों ने हार मान ली थी लेकिन रहमान हार मानने को तैयार नहीं थे। जब इंसानों से उम्मीदें खत्म होती नज़र आई तो रहमान ने मस्जिद में दुआयें मांगनी शुरू की। रहमान की दुआ रंग लाई और उनकी बहन ठीक हो गई। ये बात रहमान के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी और यही वो चमत्कार था जिसके कारण रहमान ने इस्लाम कबूल कर लिया था।

रहमान को संगीत उनके पिता आरके शेखर मलयाली से विरासत में मिली। उनके पिता फिल्‍मों में संगीत देते थे। जानें उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्‍प बातें...

1. एआर रहमान ने लंदन के ट्रिन्टी कॉलेज ऑफ म्यूजिक से वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक की डिग्री भी हासिल की है और चेन्नई में इन हाउस स्टूडियो भी बनाया है, जिसका नाम 'पंचथन रिकॉर्ड-इन' रखा है।

2. सन् 1991 में मणिरत्नम ने अपनी एक फिल्म के लिए एआर रहमान को एक गाने को कम्पोज करने के लिए ऑफर किया। फिल्म का नाम 'रोजा' था। फिल्म के लगभग ज्यादातर गाने लोगों ने काफी पसंद किया और रातोंरात उन्हें एक उभरते सिंगर और म्यूजिक कम्पोजर के रूप देखा जाने लगा। इतना ही नहीं, उन्हें पहली बार डेब्यू करते हुए इस फिल्म के लिए बेस्ट म्यूजिक कम्पोजर के रूप में इंडियन नेशनल अवॉर्ड भी मिला।



3 . रहमान ही एक ऐसे शख्स हैं, जिन्हें किसी भी म्यूजिक कम्पोजर से ज्यादा नेशलन अवार्ड मिला है। रहमान को तीन और बार भी नेशनल अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। साल 1997 में भारत की आजादी के 50 साल पूरे होने के मौके पर 'वंदे मातरम' का गाना देकर दुनियाभर से खूब सुर्खियां बटोरी।

4. साल 2001 में एआर रहमान को ओपेरा और जिसस क्राइस्ट सुपरस्टार के फैंटम कहे जाने वाले म्यूजिक कंपोजर एंड्रू लॉयड वेबर ने अपने गाने में म्यूजिक कम्पोज करने के लिए इनवाइट किया। पहली बार जब उन्होंने 'बॉम्बे ड्रीम्स' नाम की गाने को कम्पोज किया तो उन्होंने कभी इस बारे में सोचा भी नहीं था।

5. उसके बाद साल 2005 में रहमान ने 'द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' के मंच के प्रोडक्शन के लिए स्कोर बनाया। उन्होंने इंटरनेशलन व हॉलीवुड स्तर पर भी 'द लॉर्ड ऑफ वार', 'इनसाइड मैन', 'द एक्सिडेंटल हसबैंड' जैसी फिल्मों के लिए म्यूजिक ट्रैक कम्पोज किया।

6. साल 2008 में एआर रहमान को तब विश्व प्रसिद्धी प्राप्त हुए, जब फिल्म 'स्लमडॉग मिलेनियर' को मिले कुल 8 ऑस्कर अवॉर्ड में 2 अवॉर्ड बेस्ट स्कोर और बेस्ट सॉन्ग के लिए उनके नाम पर मिले। रहमान को 2 ग्रैमी अवॉर्ड, गोल्डन ग्लोब और बाफ्ता समेत कुल 15 पुरस्कार जीत चुके हैं।

7. रहमान ने अपनी पहचान 'रोजा', 'बॉम्बे', 'दिल से', 'ताल', 'लगान', 'वंदे मातरम', 'जोधा अकबर', 'स्लमडॉग मिलेनियर', '127 ऑर्स' समेत कई फिल्मों में न सिर्फ गाने गाए बल्कि शानदार म्यूजिक भी दिया।

8 . रहमान को ट्रिन्टी कॉलेज ऑफ म्यूजिक, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अन्ना यूनिवर्सिटी, मिडिलेक्स यूनिवर्सिटी और बर्कले कॉले ऑफ म्यूजिक से डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली हुई है। 2009 में उनका नाम टाइम मैगजीन ने दुनिया के टॉप 100 प्रभावित लोगों में भी शामिल किया गया।

9. साल 2011 में रहमान ने मिक जैगर, जॉस स्टोन, डैमियन मार्ले और डेव स्टेवर्ट की 'सुपर हैवी' सुपर बैंड ज्वाइन किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के म्यूजिक कलाकार नुसरत फतेह अली खान, माइकल जैक्सन, माइकल बोल्टन, एमआईए, वेनेसा मे, द पुस्सीकैट डॉल्स, सारा ब्राइटमैन, डिडो, होजम रैमजी, हैन्स जिमर और अकॉन के साथ भी काम कर चुके हैं।

10. ऑस्कर जीतने के बाद एआर रहमान ने कहा था कि 'मुझे पूरी जिंदगी में नफरत और प्यार में से किसी एक को चुनना था, मैंने प्यार को चुना और अब मैं यहां हूं।'


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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