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जन्मदिन विशेष: राहुल द्रविड़ के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

icon सतीश कुमार वर्मा | 0
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| जनवरी 11 , 2018 , 14:28 IST

'द वॉल' और 'मिस्टर डिपेंडेबल' के नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ का आज जन्म दिन है। उनका जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर में हुआ था। द्रविड़ वनडे और टेस्ट मैचों में 10 हजार से ज्यादा रन बनाने वाले केवल दूसरे भारतीय हैं तो ऐसा करने वाले केवल सात अंरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की लिस्ट में भी शुमार हैं।

फिलहाल राहुल द्रविड़ भारत की अंडर-19 टीम के कोच हैं और सीनियर टीम के लिए बेहतर टैलंट मुहैया करा रहे हैं। रिषभ पंत, ईशान किशन, संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी उनकी ही निगरानी में तैयार होकर टीम इंडिया के एंट्री गेट पर अपनी मजबूत दस्तक दे रहे हैं।

एक समय में द्रविड़ के धीमे खेलने की शैली को लेकर मजाक किया जाता था कि वह वनडे क्रिकेट भी टेस्ट के अंदाज में खेलते हैं। हालांकि, आपको बता दें कि उनके नाम वनडे क्रिकेट में लगातार मैचों में सबसे कम बार जीरो पर आउट होने का रिकॉर्ड दर्ज है। वह लगातार 120 वनडे मैचों में जीरो पर आउट नहीं हुए। टेस्ट क्रिकेट में भी उनके नाम 1654 चौके दर्ज हैं। सिर्फ सचिन ही उनसे आगे हैं। टेस्ट क्रिकेट में 30 हजार से ज्यादा गेंदों का सामना करने का रिकॉर्ड भी राहुल द्रविड़ के नाम है।

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द्रविड़ के नाम टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा 210 कैच (नॉन-विकेटकीपर के तौर पर) लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। द्रविड़ को उनके 16 साल के क्रिकेट करियर में सबसे फिट भारतीय खिलाड़ी माना जाता था। यह तब की बात है जब टीम इंडिया फिटनेस को लेकर जागरूक नहीं थी और टीम में युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ जैसे खिलाड़ी नहीं आए थे।

द्रविड़ ने 164 टेस्ट में 52.31 के औसत से 13,288 रन बनाए हैं, जिसमें 36 शतक और 63 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं, उन्होंने 344 वनडे मैचों में 39.16 के औसत से 10,889 रन बनाए हैं। द्रविड़ ने 12 वनडे शतक बनाए हैं। द्रविड़ इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका घर से अच्छा औसत बाहर के मैदानों में देखने को मिला। उन्होंने टेस्ट खेलने वाले सभी 10 देशों में शतक बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

2004 में आइसीसी ने अवॉर्ड्स देने शुरू किए थे। पहले ही साल में राहुल द्रविड़ ने 'आइसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर' और 'प्लेयर ऑफ द ईयर' की ट्रॉफी जीती थी। 2016 तक वह इकलौते ऐसे भारतीय खिलाड़ी थे जिन्हें एक ही साल में दोनों ट्रॉफी मिली हों। 2016 अश्विन को भी दोनों ट्रॉफी दी गई। द्रविड़ ने सही मायनों में असल क्रिकेट यानी टेस्ट क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दी हैं। भारतीय बल्लेबाजी के मध्यक्रम में आज भी उनके जैसे मजबूत इरादों वाले खिलाड़ी का इंतजार है।


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सतीश कुमार वर्मा

लेखक न्यूज वर्ल्ड इंडिया में वेब जर्नलिस्ट हैं

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