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हर किरदार को शिद्दत से जीते आए हैं सुनील सिंकदरलाल उर्फ शक्ति कपूर (बर्थडे स्पेशल)

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| सितंबर 3 , 2017 , 09:48 IST

बॉलीवुड में कई कलाकार आए और कई कलाकार गए लेकिन शक्ति कपूर की बात ही कुछ अलग है।शक्ति कपूर का जन्म एक बेहद मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में 3 सितंबर 1958 को नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक दर्जी की दुकान चलाते थे।

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शक्ति कपूर का रियल नाम सुनील सिकन्दरलाल था। उनके नाम बदलने के पीछे भी एक वजह हैं, दरअसल जब सुनील दत्त साहब ने संजय दत्त स्टारर फिल्म रॉकी में विलेन का रोल ऑफर किया तो उन्हें अपना नाम सुनील कपूर विलेन की तरह नहीं लगा, इसीलिए उन्होंने अपना नाम बदलकर शक्ति कपूर कर लिया।

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शक्ति कपूर की शादी शिवानी कपूर से हुई हैं। उनके दो बच्चे हैं, एक बेटा-सिद्धार्थ कपूर जो कि एक सहायक निर्देशक और डीजे हैं। उनकी बेटे श्रद्धा कपूर हैं। श्रद्धा हिंदी सिनेमा की उभरती हुई अभिनेत्री हैं। 

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शक्ति कपूर हिंदी सिनेमा में अपनी खलनायकी और कॉमिक टाइमिंग के लिए के लिए जाने जाते हैं। शक्ति कपूर ने बॉलीवुड में डेब्यू विलेन के किरदार से ही किया था। साल 1980 के दौर में शक्ति कपूर को बतौर अभिनेता पहचाना जाने लगा।  उस साल उनकी दो फ़िल्में क़ुरबानी और रॉकी ब्लॉकबस्टर हिट फ़िल्में साबित हुई थी। इन दोनों ही फिल्मों में उन्होंने मुख्य खलनायक की भूमिका अदा की थी। 

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साल 1983 में शक्ति जितेंद्र और श्रीदेवी स्टारर फिल्म हिम्मतवाला और सुभाष घई निर्देशित फिल्म हीरो में खलनायक के किरदार में नजर आएं। अपनी चार फिल्मों खलनायकी का बेहतरीन अभिनय करने के बाद शक्ति कपूर बॉलीवुड के बेहतरीन खलनायकों की श्रेणी में आ गए थे। अस्सी और नब्बे के दशक में खलनायकी के किरदार के निर्देशकों और निर्मातायोँ की पहली पसंद अमरीश पूरी या फिर शक्ति कपूर ही होते थे। 

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नब्बे के दशक में शक्ति कपूर विलेन के रोल के अलावा कॉमेडी किरदार करने शुरु कर दिए। जिस तरह वो पूरे परफेक्शन के साथ खलनायकी की भूमिका निभाते हैं उसी तरह उन्होंने कॉमिक रोल निभाए। उन्हें उनकी बेहतरीन कोमी टाइमिंग के लिए फिल्म राजा बाबू के नंदू की भूमिका अदा करने के लिए उन्हें फिल्मफेयर के कॉमिक रोल के अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी कॉमिक फ़िल्में- इंसाफ, बाप नंबरी बीटा दस नंबरी, अंदाज अपना अपना, तोहफा, राजाबाबू, हम साथ साथ हैं, चालबाज, बोल राधा बोल। 

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वह सिर्फ एक अच्छे खलनायक ही नहीं बल्कि काफी अच्छे मिमिक्री आर्टिस्ट भी हैं।  हिंदी सिनेमा में आज भी उनके प्रसिद्ध डाइलोग दर्शकों की जुबान पर चढ़े हुए हैं।  जिनमे राजा बाबू का- नंदू सबका बंदु समझता नहीं है यार,फिल्म चालबाज का मैं नन्हा सा मुन्ना सा छोटा सा बच्चा हूँ। शक्ति कपूर फिल्म इंडस्ट्री में आज जिस मुकाम पर हैं, व्हाँ उन्होंने पहुँचने के लिए इस इंडस्ट्री में कड़ी मेहनत की हैं।


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