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पारसी नववर्ष 'नवरोज'...3000 साल पहले शुरु हुई परंपरा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 17 , 2018 , 11:39 IST

पारसी समुदाय के लोग आज नववर्ष नवरोज मना रहे हैं। बताया जाता है कि नवरोज मनाने की यह परंपरा पारसी समुदाय में लगभग 3000 साल पहले शुरु हुई। पारसी समुदाय के नववर्ष को कई नामों से जाना जाता है जैसे, पतेती, जमशेदी नवरोज और नवरोज। कहा जाता है कि इसी दिन पारसी योद्धा जमशेद ने पहली बार वार्षिक कलेंडर से लोगों को अवगत कराया ।

NAVROJअगस्त माह में पारसी समाज का नववर्ष मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 17 अगस्त 2018 को मनाया जा रहा है। पारसी नववर्ष को 'नवरोज' कहा जाता है। बदलते वक्त ने पारसी धर्म में भी जिंदगी ने कई खट्टे-मीठे अनुभव कराए, लेकिन हमारे संस्कार ही हैं जिसके दम पर आज भी अपने धर्म और इससे जु़ड़े रीति-रिवाजों को संभाले हुए हैं।

नवरोज वसंत ऋतु में उस दिन मनाया जाता है, जब दिन और रात बराबर होते हैं। पारसी इस दिन खास तरह के पकवान बनाते हैं, जिन्हें वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करते हैं। साथ ही यह लोग एक-दूसरे को उपहार भी देते हैं और दोस्तों के प्रति उनके सहयोग और प्रेम के लिए आभार भी व्यक्त करते हैं।

NAV___पारसी समाज में अग्नि का भी विशेष महत्व है और इसकी खास पूजा भी की जाती है। नागपुर, मुंबई, दिल्ली और गुजरात के कई शहरों में आज भी कई सालों से अखंड अग्नि प्रज्वलित हो रही है। इस ज्योत में बिजली, लकड़ी, मुर्दों की आग के अलावा तकरीबन 8 जगहों से अग्नि ली गई है। इस ज्योत को रखने के लिए भी एक विशेष कमरा होता है जिसमें पूर्व और पश्चिम दिशा में खिड़की, दक्षिण में दीवार होती है।

पारसी नववर्ष का त्योहार दुनिया के कई हिस्सों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है जिसमें ईरान, पाकिस्तान, इराक, बहरीन, ताजिकिस्तान, लेबनान तथा भारत में भी यह दिन विशेष तौर पर मनाया जाता है।


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