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हरियाणा: नगर निगम चुनावों में नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिला तो दोबारा होगा चुनाव

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| नवंबर 22 , 2018 , 17:59 IST

हरियाणा चुनाव आयोग ने पांच जिलों में होने वाले नगर निगम चुनाव में नोटा यानी ‘इनमें से कोई नहीं’ को प्रत्याशी की तरह काउंट करने का फैसला किया है। इसके तहत अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं तो वहां चुनाव दोबारा कराया जाएगा। पहली बार वाले प्रत्याशी अयोग्य घोषित हो जाएंगे। देश में ऐसा पहली बार हो रहा है। हरियाणा में यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक और हिसार नगर निगम के चुनाव की घोषणा हुई हैं।

राज्य में पहली बार मेयर का सीधा चुनाव होगा इसलिए आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने गुरूवार से ही मतदाताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया है। नगर निगम चुनावों को 2019 के लोकसभा व विधानसभा चुनावों से पहले 20-20 मैच माना जा रहा है।

हरियाणा चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 1 से 6 दिसंबर तक नामांकन हो सकेगा। सात दिसंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी साथ ही उम्मीदवार 8 दिसंबर तक नाम वापस ले सकेंगे। 16 दिसंबर को वोटिंग होगी व 19 दिसंबर को मतगणना के बाद चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। मतदान के लिए ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल होगा व नगर निगम के चुनाव मेयर के चुनाव के लिए अलग ईवीएम मशीन होगी।

नोटा काल्पनिक चुनावी उम्मीदवार

हरियाणा के मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. दिलीप सिंह ने गुरुवार को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नोटा को काल्पनिक चुनावी उम्मीदवार माना जाएगा। अगर दूसरी बार चुनाव कराने पर भी नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं तब दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया जाएगा।

लोकसभा, विधानसभा चुनाव में नोटा की संख्या कम

चुनाव आयुक्त का कहना था कि लोकसभा, विधानसभा चुनाव में नोटा को काफी कम वोट मिलते हैं। लेकिन नगर निगम और नगर पालिका चुनाव में मतदाता संख्या अपेक्षाकृत काफी कम होती है। ऐसे में नोटा को किसी उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिलने की संभावना रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला अभी सिर्फ नगर निगम चुनाव में ही लागू रहेगा।

तीन साल पहले लागू हुआ था नोटा

चुनाव आयोग ने देशभर में होने वाले चुनावों के लिए 2015 से नोटा लागू किया था। इसमें वोटिंग मशीन या बैलट पेपर पर ‘इनमें से कोई नहीं’ का विकल्प दिया जाता है। यानी आप मौजूदा प्रत्याशियों में से किसी को भी वोट नहीं देना चाहते तो नोटा को चुन सकते हैं।

नोटा का भी दिख सकता है असर

बता दें कि यमुनानगर, करनाल व पानीपत में स्थानीय स्तर पर नगर निगमों के सामने कई तरह की समस्याएं रही हैं, जिन्हें चेयरमैन व पार्षद हल करवाने में काफी हद तक विफल रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या सफाई व गलियों के उबड़-खाबड़ होने की रही है, जिसे लेकर स्थानीय वोटर नाराज भी हैं। अगर उनकी नाराजगी दूर नहीं होती तो वे चुनाव में मतदान के समय नोटा का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूकेंगे।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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